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जहां पढ़े, वहां बनवाई 30 लाख की लैब, बोले- आज भी दिल में बसा है यह स्कूल

5 वर्ष पहले
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अजमेर. अमेरिका में बसकर भी जगजीत कपूर अपने दिल से उस सरकारी स्कूल को नहीं भुला पाए, जहां पर उन्होंने शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने मन में ठाना कि जिस स्कूल से शिक्षा-दीक्षा लेकर वह अमेरिका में बिजनेसमैन बने हैं और जैसी वहां की टेक्नोलॉजी है, सरकारी स्कूल के बच्चों को भी वह टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे लाएंगे।
उन्होंने उसी सरकारी तोपदड़ा स्कूल में करीब 30 लाख लागत से कंप्यूटर लैब बनवा दी। मंगलवार को उन्होंने फीता काटकर इस कंप्यूटर लैब का शुभारंभ भी कर दिया।
भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया, पत्नी अच्छी स्कूल में पढ़ी हुई थी। पिताजी मोहन नारायण कपूर रेलवे में सेक्शन ऑफिसर थे। चौथी कक्षा में गांधी भवन स्कूल में पढ़ाई की और आठवीं कक्षा के बाद नवीं में तोपदड़ा स्कूल में प्रवेश लिया। यहां से हायर सैकंडरी पास कर ली। उसके बाद से लंबे समय तक अजमेर से कोई नाता नहीं रहा। अमेरिका गए तो वहां के लोगों ने उनसे सवाल किया कि क्या तुम मेयो कॉलेज में पढ़े हुए हो, जवाब दिया ‘नहीं मैं गरीब स्कूल में पढ़ा हुआ हूं।’
टेक्नोलॉजी में क्यों पीछे रहे सरकारी स्कूल के बच्चे

अमेरिका में रहते हुए उनके मन में आया कि जिस स्कूल से शिक्षा पाने के कारण आज वे जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उस स्कूल के लिए उन्हें भी कुछ करना चाहिए। उन्होंने अपने साथियों की ही बनाई संस्था अमेरिका इंडियन फाउंडेशन से बातचीत की और अपनी इच्छा बताई। सरकारी स्कूल के बच्चे प्राइवेट स्कूलों के मुकाबले टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पीछे रहते हैं, तो उन्होंने सरकारी स्कूल के बच्चों को भी टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ाने की ठानी।
अजमेर आए और तोपदड़ा स्कूल के प्रिंसिपल से बातचीत कर कंम्प्यूटर लैब बनवाने का प्रस्ताव रखा। आज उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्होंने जिस स्कूल में शिक्षा ग्रहण की, उसके लिए वे कुछ कर पाए हैं। स्कूल के प्रिंसिपल शंभू सिंह लांबा ने कपूर का आभार जताया। कपूर ने 12वीं कक्षा के बच्चों को अच्छी पढ़ाई व अच्छे काम करने की सीख भी दी।