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मंत्री जी बार-बार कह रहे हैं उनसे पूछ कर किए जाएं तहसीलदारों के तबादले

5 वर्ष पहले
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अजमेर. प्रदेश के तहसीलदारों और उप पंजीयकों के तबादला आदेश यूं तो सालों से राजस्व मंडल की ओर से जारी किए जाते हैं, लेकिन मौजूदा राजस्व मंत्री काे तबादला आदेशों में शायद तवज्जो नहीं दी जा रही है।
यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों से राजस्व मंत्री अमराराम तहसीलदारों और उप पंजीयकों के तबादला आदेशों को लेकर परेशान हैं। नौकरशाही पर असर होता नहीं देख अब राजस्व मंत्री ने अपने विभाग की संयुक्त शासन सचिव के जरिए सीधे ही राजस्व मंडल को आदेश जारी करवा दिए हैं। इस आदेश में साफ लिखा है कि मंत्री जी के निर्देश हैं तहसीलदारों और उप पंजीयकों के तबादले और पदस्थापन सरकार के अनुमोदन के बाद ही किए जाएं।
राजस्व विभाग की संयुक्त शासन सचिव दुर्गा जोशी ने हाल ही में राजस्व मंडल के रजिस्ट्रार को एक पत्र भिजवाया है। इसमें कहा गया है कि राजस्व विभाग के मंत्री के निर्देशानुसार राजस्थान सेवा नियम के नियम 20 के तहत प्रशासनिक विभाग को पूर्ण शक्तियां प्राप्त हैं।
इसलिए राजस्व मंडल सरकार के अनुमोदन के पश्चात ही तहसीलदारों और उप पंजीयकों के तबादले और पदस्थापन आदेश जारी किए जाएं। इस पत्र में यह भी निर्देश दिए गए हैं कि राजस्व मंडल के स्तर पर इसकी पालना निश्चित कराई जाए। पत्र राजस्व मंडल को पहुंचाने की जानकारी भी राजस्व विभाग की ओर से मंत्री के निजी सचिव को दे दी गई है।
ढाई महीने से चल रहा है मुद्दा
दरअसल तहसीलदारों की नियुक्ति का अधिकार राजस्थान तहसीलदार सेवा नियम 1956 के तहत राजस्व मंडल अध्यक्ष को है। यही वजह है कि तहसीलदारों और उनमें से ही बनने वाले उप पंजीयकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई से लेकर पदोन्नति व पदस्थापन और तबादले के आदेश राजस्व मंडल के स्तर से ही जारी किए जाते रहे हैं।
पिछले दिनों राजस्व मंत्री अमराराम ने तबादला आदेशों से पहले अनुमोदन का निर्देश दिया था, लेकिन तब इसे गंभीरता से नहीं लिया और इसके बाद कई बार तबादले और पदस्थापन आदेश जारी हो गए। इसके बाद उनकी ओर से 30 दिसंबर 2015 को और 14 जनवरी 2016 को राजस्व विभाग के आला अधिकारियों को लिखित निर्देश प्रदान किए गए।
बाबू की बदली गई थी सीट
तबादला आदेशों में मंत्रीजी की पूछ नहीं होने व राजस्व मंडल व राजस्व विभाग के आला अधिकारियों की मनमानी की गाज पिछले दिनों राजस्व मंडल में आरटीएस शाखा के बाबू पर गिरी थी। इस बाबू की सीट बदलने के लिए मंत्री के कार्यालय की ओर से आदेश जारी किए गए थे।
राजस्व मंडल देगा जवाब
राजस्व मंडल की ओर से राजस्व विभाग को जल्द ही जवाब भिजवाया जाएगा। मंडल सूत्रों के अनुसार मंत्री के निर्देश में राजस्थान सेवा नियम के जिस नियम 20 का हवाला देते हुए प्रशासनिक विभाग को शक्तियां प्राप्त होने का उल्लेख है, वह सही नहीं है। नियम 20 में साधारण रूप से यह लिखा गया है कि कुछ परिस्थितियों को छोड़कर सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारी के तबादले किए जा सकते हैं।
इस नियम के तहत सरकार का अर्थ , मंत्री या प्रशासनिक विभाग नहीं है, बल्कि वही विभाग है जिसके द्वारा कर्मचारी की नियुक्ति व विभागीय कार्रवाई सहित अन्य कार्य किए जाते हैं। इसी आधार पर राजस्व मंडल प्रशासन की ओर से वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सकता है। पूर्व में भी इसी आधार पर जवाब दिए गए थे।
मंत्री ने नहीं उठाया फोन
राजस्व मंत्री से उनके मोबाइल व निवास स्थान के फोन पर बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फाेन नहीं उठाया। सरकारी वेबसाइट पर उनके निजी सचिव का नंबर भी गलत दर्ज है। राजस्व विभाग में पटवारी से लेकर संभागीय आयुक्त तक को सीयूजी प्लान के तहत मुफ्त फोन दिए हुए हैं, जिस पर सरकार हर साल 1 करोड़ 32 लाख रुपए खर्च करती है।
मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों इन नंबरों को हेल्पलाइन के रूप में उपयोग लिए जाने का भी निर्देश जारी किया था, लेकिन महकमे के मुखिया राजस्व मंत्री ही मोबाइल और लैंडलाइन फोन पर जवाब नहीं दे रहे हैं तो विभाग के बाकी अधिकारियों व कार्मिकों की स्थिति बताने की जरूरत नहीं है।