अजमेर। शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के लिए राजस्थान हाईकोर्ट के दिशा निर्देशों की पालना कराने की बजाय इरादतन खानापूर्ति करने पर चंद्रवरदाई नगर निवासी रवि नरचल की याचिका में नगर निगम पर सवाल उठाए गए हैं।
नरचल ने मेयर धर्मेंद्र गहलोत सहित डिप्टी कमिश्नर सीमा शर्मा, आरओ प्रकाश डूडी और नगरीय विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव परमजीत सिंह के खिलाफ पेश अवमानना याचिका में बताया है कि किस तरह से निगम प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश की पालना करने में जानबूझकर कोताही की है और खानापूर्ति के लिए मात्र कुछ निर्माण ही सीज किए गए हैं। इस बाबत विभिन्न समाचार पत्रों में दायर हुई खबरों काे भी आधार बनाया है। याचिका में कहा गया है कि जब 52 अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ अदालत में अभियोजन की कार्रवाई की गई है तो उनके निर्माण सीज क्यों नहीं किए गए और क्यों नहीं तोड़े जा रहे हैं, जबकि खुद नगर निगम ने शहर में 490 अवैध निर्माण की सूची हाईकोर्ट के समक्ष पेश की थी।
याचिकाकर्ता को ही फंसाने की साजिश : याचिका में यह भी बताया गया है कि जब उन्होंने नगर निगम के अफसरों को हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करने के लिए कहा तो उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाकर गिरफ्तार करवाने और जेल भिजवाने की साजिश रचकर डराया धमकाया गया। नरचल ने बताया कि वे अफसरों की इन ओछी हरकतों से दबाव में नहीं आए और हाईकोर्ट के आदेशों की नियमानुसार पालना कराने के लिए कृत संकल्प होकर अवमानना याचिका दायर की है, ताकि दोषियों को सजा मिले और अदालती आदेश की पालना हो पाए।
ये हैं हाईकोर्ट के आदेश के प्रमुख अंश
डीएलबी पर की थी टिप्पणी : अवैध निर्माण के खिलाफ जैसे ही कार्रवाई शुरू होती है डायरेक्टर लोकल बॉडी यानी डीएलबी में याचिका दायर कर दी जाती है। डीएलबी की स्थिति यह है कि लगभग सभी मामलों में निगम से संबंधित निर्माण का रिकार्ड तलब कर कार्रवाई रोक दी जाती है। खंडपीठ ने कहा कि “हर मामले में रिकार्ड तलब नहीं होना चाहिए, न ही बिना कारण अभिलिखित किए बगैर निगम की कार्रवाई पर रोक लगाई जानी चाहिए। डीएलबी अगर अवैध निर्माण से जुड़ी फाइल तलब करती है तो इसका निपटारा अधिकतम एक माह में करना जरूरी हाेगा।’
पहले सीज करो फिर करो सुनवाई : हाईकोर्ट ने नगर निगम की ओर से पेश की गई 490 अवैध निर्माण की सूची पर कहा था कि पहले ऐसे निर्माणों को सीज किया जाए। इसके बाद सुनवाई कर जिस स्तर तक कंपाउंड हो तो उसका निपटारा होना चाहिए। अगर कंपाउंडेबल नहीं है तो ध्वस्त करने की कार्रवाई की जानी चाहिए। खंडपीठ ने कहा था अजमेर के दरगाह क्षेत्र सहित आसपास के एरिया में कई पुरानी जीर्ण-शीर्ण बिल्डिंग हैं। यह आमजन के लिए खतरा बनी हुई है। खंडपीठ ने नगर निगम को अादेश दिया है कि ऐसी बिल्डिंग के मालिकों या वहां रहने वालों को नोटिस जारी किए जाएं कि इन्हें तत्काल ध्वस्त करें।
आनासागर का एरिया नोटिफाइड हो : खंडपीठ ने कहा था कि आनासागर का एरिया फैसले के तीन दिन में नोटिफाइड किया जाए, जो नगर निगम ने अब तक नहीं किया है। नोटिफाइड एरिया आनासागर के फुल टेंक लेवल यानी एफटीएल जो 13 फीट है या फिर मैक्सिमम वाटर लेवल यानी एमडब्ल्यूएल जो 15 फीट पर तय होगा। इस नोटिफाइड एरिया में किसी भी प्रकार के निर्माण नहीं रखे जाने के आदेश थे।
नोटिफाइड एरिया के 250 मीटर रेडियस में निर्माण नहीं : हाईकोर्ट ने आनासागर का एरिया नोटिफाइड करने के आदेश के साथ ही यह भी कहा था कि इस नोटिफाइड एरिया के 250 मीटर रेडियस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण आगे नहीं होने चाहिए।
हाथ पर हाथ धरे नहीं देखते रहे अवैध निर्माण : खंडपीठ ने नगर निगम को साफ कहा था कि वह हाथ पर हाथ धरे अवैध निर्माण होते देखते नहीं रहें, बल्कि सख्त कदम उठाएं।