अजमेर. राजस्व मंडल ने आखिर वर्षों पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए कानूनी प्रावधानों की पालना करते हुए फैसले सुनाने की लिए पारदर्शी व्यवस्था शुरू कर दी है। इस व्यवस्था के तहत अब सुनवाई समाप्त होने के बाद 30 दिन के भीतर सदस्य को फैसला सुनाना होगा। फैसला सुनाने की तारीख भी वकील और पक्षकार को बताई जाएगी।
इससे पहले मंडल में यह परंपरा बन गई थी कि प्रकरण की सुनवाई समाप्त होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया जाता था और सदस्य अपनी मर्जी से किसी भी तारीख को फैसला पारित कर देते थे। इससे मंडल की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे थे, वहीं भ्रष्टाचार पनपने की आशंका भी थी।
राजस्व मंडल की अध्यक्ष नीलिमा जौहरी ने फैसलों को पारित किए जाने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया में बदलाव करते हुए राजस्थान रेवेन्यू कोर्ट मैन्युअल सहित सिविल प्रक्रिया संहिता के कानूनी प्रावधानों की पालना करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही यह भी तय किया गया है कि मंडल में सभी बैचों में सदस्यों द्वारा प्रकरण की सुनवाई के बाद फैसले को अघोषित तिथि तक सुरक्षित या रिजर्व नहीं रखा जाएगा। फैसला 30 दिन के भीतर ही सुनाया जाना चाहिए। इस व्यवस्था से जहां मंडल की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, वहीं पक्षकारों को यह मालूम रहेगा कि उनके प्रकरण में सुनवाई पूरी होकर अमुक तारीख को फैसला सुनाया जाएगा।
कानून भी कहना है पारदर्शी हो व्यवस्था
- राजस्थान रेवेन्यू कोर्ट मैन्युअल 1956 की धारा 63 में निर्णय की अधिघोषणा को लेकर साफ प्रावधान है कि मुकदमा सुनवाई के पश्चात, निर्णय या तो उसी समय अथवा आगे की किसी दिनांक को जो दिवस सूची में अधिसूचित की जाएगी, अधिघोषित किया जाएगा।
-सिविल प्रकिया संहिता के आदेश 20 नियम 1 में निर्णय कब सुनाया जाएगा, इस बारे में बताया गया है। इसके अनुसार न्यायालय मामले की सुनवाई कर लेने के पश्चात निर्णय खुले न्यायालय में या तो तुरंत या तत्पश्चात यथासाध्य शीघ्र किसी भविष्यवर्ती दिन को सुनाएगा और निर्णय किसी भविष्यवर्ती दिन को सुनाया जाना है, तब न्यायालय उस प्रयोजन के लिए कोई दिन नियत करेगा, जिसकी सम्यक सूचना पक्षकारों या उनके प्लीडरों को दी जाएगी।
न्यायालय पंद्रह दिन में निर्णय सुनाने का पूरा प्रयास करेगा और साध्य नहीं हो तो आगामी तारीख तय करेगा, लेकिन वह मामले की सुनवाई समाप्त होने से 30 दिन के बाद की नहीं होगी और जहां 30 दिन में नहीं सुनाया जाता है वहां विलंब के कारण लेखबद्ध किए जाएंगे।
भ्रष्टाचार की आशंका हुई समाप्त
पिछले कुछ सालों से मंडल की साख को कई मामलों ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है, चाहे वह फर्जी फैसले बनाने से जुड़ा हो, कनेक्टेड मुकदमों में से एक की सुनवाई और दूसरे में तारीख देने का हो या फिर बैकडेट में फैसला करने का मामला हो। सूत्र बताते हैं कि मंडल में प्रकरण की सुनवाई के बाद लंबे समय तक के लिए निर्णय सुनाए जाने के लिए आरक्षित रख लिया जाता था।
जिस दिन निर्णय सुनाया जाता है उस पर उस दिन की ही तारीख अंकित होगी, यह भी दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि पक्षकारों के वकीलों को बुलाकर निर्णय पारित करने बाबत नोट करवाया जाता था। कई प्रकरणों में तो महीनों तक फैसले नहीं होते हैं और फिर अचानक ही या तो फैसला सुना दिया जाता है या फिर सदस्य इसे रिलीज कर दुबारा सुनवाई में रख देते थे। इससे विभिन्न स्तर पर भ्रष्टचार पनपने की आशंका के साथ ही इसकी कालिख मंडल पर लग रही थी।
नई व्यवस्था की शुरुआत हुई
सोमवार को राजस्व मंडल के सदस्य एलडी यादव और प्रियव्रत पांड्या की डिवीजन बैंच ने राजस्थान टिनेंसी एक्ट के तहत पेश की गई द्वितीय अपील की सुनवाई पूरी की थी। सांवरलाल बनाम कजोड़ के इस मामले में पक्षकारों की ओर से वकील भवानी सिंह शक्तावत और मुकेश जैन मौजूद थे।
प्रकरण में फैसला सुनाए जाने के लिए 10 अक्टूबर 2014 की पेशी तय की है। पुरानी परंपरा से हटकर यह पहला मौका है, जबकि मंडल की बैंच ने प्रकरण में फैसले की तारीख नियत कर दी है।