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ये है सबसे युवा बहादुर, भाई की जान बचाने के लिए कूद पड़ा आग के दरिया में

8 वर्ष पहले
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अजमेर. राजस्थान के वीर अपनी वीरता के झंडे गाड़ते आए हैं। इसी वीरता की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले नन्हे वीर डूंगर सिंह को देश के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया था। दरअसल, 27 मार्च, 2011 को अपने घर में शॉर्ट सर्किट की आग से विकलांग भाई महेन्द्रसिंह को जिंदा निकाल लाने की वजह से डूंगरसिंह को इस वर्ष के बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। महज सात वर्ष का डूंगरसिंह औसत परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद अपनी वीरता के बूते पूरे देश में अपना, अपने परिवार और गांव का नाम रौशन कर चुका है।
पोखरण के 10 वर्षीय डूंगर सिंह ने झोपड़े में आग लग जाने पर जान की परवाह नहीं करते हुए अपने दो भाइयों की जान बचाई थी। अपने भाइयों को बचाने वाले इस नन्हें वीर के हाथ-पैर झुलस गए थे। सिर्फ सात साल और तीन महीने की उम्र में डूंगर को वीरता पुरस्कार मिला। साल 2011 में राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित होने जा रहे 24 बच्चों में डूंगर सबसे कम उम्र का था।
27 मार्च 2011 की शाम का समय था। घड़ी में करीब छह बजे थे। डूंगर उस समय अपने छोटे विकलांग भाई के साथ घर पर अकेला था और शार्ट सर्किट की वजह से कच्चे घर में अचानक आग लग गई। आग लगने पर वह पहले घर से बाहर आ गया लेकिन फिर उसे याद आया कि उसका छोटा भाई अंदर कमरे में है। वह विकलांग है और खुद बाहर नहीं आ सकता था। यही बात सोच कर वह घर में घुस गया और आग के बीच से भाई को जिंदा लेकर बाहर आया। अपनी जान की परवाह किए बिना छोटे भाई को बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी।
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