अजमेर। प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के चुनाव का बिगुल बज गया है। चुनाव भी चार माह की समय सीमा में करवाने होंगे। इसके लिए सहकारिता विभाग ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने उन सभी ग्राम सेवा सहकारी समितियों, मार्केटिंग, सेंट्रल को-ऑपरेटिव व भूमि विकास बैंक के संचालक मंडलों की सूची मांग ली है, जिनका कार्यकाल समाप्त हो गया है।
राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण बने होने के बावजूद प्रदेश में समय पर चुनाव नहीं करवाए जा सके। राज्य सरकार ने बैंक के उप नियमों में संशोधन की आड़ में समय पर चुनाव नहीं करवाकर कलेक्टर व अन्य अधिकारियों को प्रशासक बना दिया। अब हाईकोर्ट की फटकार के बाद अब चार माह में चुनाव करवाने पड़ेंगे। सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक, भूमि विकास बैंक व क्रय-विक्रय सहकारी समितियों के निर्वाचित संचालक मंडल का कार्यकाल सितंबर के अंत में पूरा हो गया था, लेकिन सरकार ने संचालक मंडल के कार्यकाल की अवधि पूरी होने के बाद नोटिस जारी किए। सरकार ने अध्यक्ष समेत सभी डायरेक्टरों को सुनवाई के लिए 17 अक्टूबर की तारीख तय की थी।
अजमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष जयराम चौधरी व भूमि विकास बैंक अजमेर के पूर्व अध्यक्ष रमेश चौधरी ने नियमों के तहत आपत्ति दर्ज करवा दी। साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाते हुए कहा कि राजस्थान राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण का गठन होने के बावजूद समय पर चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं। उन्होंने नियमों का भी हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल पूरा होने के पहले ही नए संचालक मंडल के लिए चुनाव करवाने जरूरी हैं। सुनवाई के बाद आखिर हाईकोर्ट ने चार माह के अंदर चुनाव करवाने के निर्देश दिए। इस निर्णय की पालना में चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।