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दीपदर्शन सोसायटी घोटाला: भूखंड और भवन अवैध करार

9 वर्ष पहले
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अजमेर.वरिष्ठ नगर नियोजक ने बहुचर्चित दीपदर्शन सोसायटी की माधवनगर योजना में सड़क की भूमि पर निर्मित मकान और भूखंड को अवैध करार दिया है। विभाग ने राज्य सरकार के आदेश से किए गए सर्वे के बाद रिपोर्ट में कहा है कि योजना के स्वीकृत प्लान में सौ फीट चौड़ा रोड है, लेकिन सोसायटी ने रोड की चौड़ाई चालीस फीट कर शेष साठ फीट की भूमि पर भूखंड आवंटित कर दिए।
राज्य सरकार ने नगर निगम प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि माधव नगर को मूल स्वरूप में लाने के लिए रोड की जद में आ रहे मकानों को अतिक्रमण करार देकर हटाया जाए और भूखंडों को कब्जे में लिया जाए। उल्लेखनीय है कि सौ फीट रोड की जद में नगर निगम मेयर कमल बाकोलिया का बंगला सहित करीब तीस मकान और भूखंड हैं।
नगर निगम की सीईओ विनिता श्रीवास्तव और अन्य अधिकारी इस मामले में टिप्पणी से चुप्पी साधे हुए हैं। दीपदर्शन सोसायटी भूमि घोटाले के उजागर होने के बाद नगर निगम ने 21 जून 2011 में सोसायटी की माधवनगर योजना में 59 भूखंड कब्जे में लिए थे और दस दुकानें सीज कर दी थी। नगर निगम ने माधवनगर को निगम के कब्जे में करार देते हुए स्वामित्व का बोर्ड भी लगा दिया था।
मामले में राज्य सरकार ने नगर निगम और मुख्य नगर नियोजक से योजना का सर्वे करने के निर्देश दिए थे और वास्तविक स्थिति की जानकारी मांगी थी। नगर निगम प्रशासन और वरिष्ठ नगर नियोजक ने सर्वे के बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी।
इसमें वरिष्ठ नगर नियोजक अनिल पथरिया ने रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि माधव नगर योजना में सौ फीट चौड़ा रोड स्वीकृत किया गया था, लेकिन इसके विपरीत सोसायटी ने रोड को चालीस फीट का कर दिया और शेष भूमि पर भूखंड आवंटित कर दिए।
रिपोर्ट में वरिष्ठ नगर नियोजक ने कहा है कि योजना को मूल स्वरूप में लाने के लिए सौ फीट रोड की जद में आने वाले मकानों को अतिक्रमण मानकर हटाया जाए और भूखंड को कब्जे में लिया जाए।
अधिकारियों का टालमटोल जवाब
दीपदर्शन सोसायटी की माधवनगर योजना में सौ फीट रोड की जद में आने वाले मेयर कमल बाकोलिया के मकान सहित अन्य मकानों के खिलाफ क्या नगर निगम प्रशासन मुख्य नगर नियोजक की राय के अनुसार कार्रवाई करेगा। इस बारे में नगर निगम के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।
सीईओ विनिता श्रीवास्तव ने तो इस मामले से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि वह पिछले दिनों अवकाश पर थी, फाइल का अवलोकन ही नहीं किया। इस बारे में डीटीपी श्रीगोपाल चित्तौड़िया ने रिपोर्ट की पुष्टि की है, लेकिन जानकारी देने से इनकार कर दिया।
नगर निगम के तत्कालीन सीईओ सीआर मीणा ने बताया कि राज्य स्तरीय जांच में नगर निगम और मुख्य नगर नियोजक से योजना के सर्वे कर वास्तविक स्थिति की जानकारी सरकार ने मांगी थी। सरकार पूर्व में ही इस योजना में निर्माण स्वीकृति निरस्त करने के आदेश नगर निगम प्रशासन को दे चुकी है।