अजमेर/जयपुर. राज्य सरकार ने आरपीएससी के वरिष्ठ सदस्य डॉ. आर.डी.सैनी को आयोग का कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किया है। हबीब खान गौराण का इस्तीफा मंजूर करने के बाद मंगलवार को राज्य सरकार ने सैनी की नियुक्ति के आदेश जारी किए।
राजभवन से गौराण का इस्तीफा सरकार को सोमवार रात को ही मिल गया था। इसे मंगलवार को स्वीकार कर पुन: राज्यपाल काे भेज दिया गया। इस बीच नए चेयरमैन की नियुक्ति को लेकर सरकार के बीच चर्चा हुई।
शाम तक कोई नाम तय नहीं हो पाया तो सैनी को कार्यवाहक चेयरमैन बनाना तय किया। इस बीच रात 8.30 बजे आयोग सचिव नरेश कुमार ठकराल के पास फोन पर इस संबंध में सूचना आ गई थी।
बाद में कार्मिक विभाग से फैक्स भी प्राप्त हो गया। हालांकि आरपीएससी की जिस कदर बदनामी हुई है उसको देखते सरकार स्थायी चेयरमैन की व्यवस्था तत्काल करने के मूड में है। इस पर कवायद भी शुरू हो गई है।
आरपीएससी की छवि सुधारना सबसे बड़ी चुनौती
हो सकता है नवरात्रों में आरपीएससी को नया चेयरमैन मिल जाए। क्योंकि आरपीएससी का नाम पिछले एक साल में इतना बदनाम हो गया है कि उसकी विश्वसनीयता दाव पर है। सरकार के सामने यह चुनौती रहेगी कि चेयरमैन ऐसा हो जो बदनामी के धब्बों को धो सके। आरपीएससी के प्रति लोगों का विश्वास फिर से कायम हो सके।
18 जून 2013 से हैं सदस्य
कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार के समय 18 जून 2013 को डॉ. सैनी को आयोग में सदस्य बनाया गया था। वे इस समय आयोग में वरिष्ठ सदस्य हैं। वे पूर्व में राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। आयोग सदस्य सुरजीतलाल मीणा और डॉ. के.आर. बगड़िया से वरिष्ठ हैं।
भारद्वाज का नाम चर्चा में
आरपीएससी चेयरमैन के लिए सबसे अधिक चर्चा में जो नाम उभर कर सामने आया है वह डीजीपी ओमेंद्र भारद्वाज का। डीजीपी अगले साल फरवरी में रिटायर होने वाले हैं। सरकार की गुड बुक में हैं।
भारद्वाज की जगह एसीबी के डीजी मनोज भट्ट को नया डीजीपी बनाया जा सकता है। हालांकि, यह सिर्फ प्रशासनिक हलकों में चर्चा मात्र है।