अजमेर. कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को दो साल बाद हुई डीएलसी की बैठक में विधायकों के दबाव की वजह से प्रशासन अपने मन मुताबिक दरों में बढ़ोतरी नहीं कर पाया। बैठक में जिलेभर की कृषि भूमि पर दस प्रतिशत, आवासीय में पंद्रह और व्यावसायिक भूमि पर बीस प्रतिशत दरों में वृद्धि करने का फैसला किया गया।
पहली बार विधानसभा क्षेत्र के बजाए पूरे जिले में एक समान वृद्धि हुई है। समान दरों में वृद्धि होने की वजह से पूरे जिले में समानता रहेगी एवं आम नागरिकों को फायदा होगा। इसके अलावा तीन विधायक जो बैठक में शामिल नहीं हुए, उनके क्षेत्रवासियों को भी खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने 15 से लेकर 35 प्रतिशत तक डीएलसी दरों मे वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा था।
बैठक में विधायक वासुदेव देवनानी, भागीरथ चौधरी, सुरेश रावत, शंकर सिंह रावत और राम नारायण गुर्जर ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि वर्तमान में बाजार में बंदी है। ऐसे में दरों में वृद्धि करने से बाजार पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। विभाग को आय भी नहीं होगी।
सभी विधायकों का कहना था कि दरें ऐसी होने चाहिए, जिससे लोगों पर भार नहीं पड़े, साथ ही विभाग को राजस्व मिले। कलेक्टर भवानीसिंह देथा ने सभी के विचार सुनने के बाद जिले में दरों में एक समान वृद्धि करने का फैसला किया। बैठक में कृषि भूमि पर दस, आवासीय में पंद्रह और व्यावसायिक में बीस प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई।
' जिले में डीएलसी की दरों में एक समान वृद्धि की गई है। इसमें आम नागरिकों के साथ विभाग की आय का भी ध्यान रखा गया है। दरें धरातल को ध्यान में रखकर बढ़ाई गई है।'
-भवानी सिंह देथा, कलेक्टर
बैठक में शामिल नहीं हुए तीन विधायक
...फिर बी नहीं उठाना पड़ेगा खामियाजा
बैठक में विधायक अनिता भदेल, केकड़ी के विधायक शत्रुघ्न गौतम और सुशील कंवर पलाड़ा शामिल नहीं हुई। विधायक अनिता भदेल बैठक में शरीक नहीं हुईं।
अफसरों से पहले ही बात कर कुछ दरों को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन बैठक में जिले में एक समान वृद्धि करने के प्रस्ताव से उन विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को खामियाजा नहीं उठाना पड़ेगा, जिनके विधायक शामिल नहीं हुए। बैठक में सांसद सांवरलाल जाट, राज्य सभा के सांसद भूपेंद्र सिंह के अलावा प्रधानों को भी बुलाया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए।
लागू हो गईं दरें
दरें शाम को तय हुई, लेकिन यह दरें शुक्रवार से ही लागू हो गई है। यानी शुक्रवार को पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग में जितने भी दस्तावेज रजिस्ट्री के लिए आए हैं, उनसे नई दरों से राशि वसूल की जाएगी।
दरों में वृद्धि की संभावना को देखते हुए लोगों ने पहले ही रजिस्ट्री करा ली थी। दरें बढ़ने से विभाग को बीस करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलने की उम्मीद है। अभी तक विभाग को प्रति वर्ष 50 करोड़ रुपए की आय होती थी।
अब प्रमुख मार्गों के भवनों की व्यावसायिक रजिस्ट्री
शहर के प्रमुख मार्गो में स्थित सभी व्यावसायिक अथवा आवासीय भवनों की रजिस्ट्री अब व्यावसायिक दर पर होगी। यह फैसला शुक्रवार को हुई डीएलसी की बैठक में लिया गया। विभाग को इससे अधिक राजस्व मिलेगा।
बैठक में फैसला किया गया है कि शहर के प्रमुख मार्गो पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही है, लिहाजा इन क्षेत्रों में चाहे भवन का आवासीय उपयोग किया जा रहा है, लेकिन उसका बेचान होने पर व्यावसायिक दर से शुल्क वसूला जाएगा। उदाहरण के लिए, अगर आपके भवन में नीचे दुकान है और ऊपर मकान है, तो इसको बेचने पर पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग पूरे भवन की व्यावसायिक दर से गणना करेगा।
गौरतलब है कि पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग रजिस्ट्री व्यावसायिक मान कर रहा है, लेकिन नगर निगम अथवा अजमेर विकास प्राधिकरण उस भवन को आवासीय मानते हैं। इन भवनों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालन करने में कार्रवाई होती है। भवन मालिक को आवासीय भवन का व्यावसायिक उपयोग करने के लिए निकायों से भू उपयोग परिवर्तन कराना होगा। वैसे विभाग को आवासीय उपयोग होने पर आवासीय दर ही वसूल करनी चाहिए।
विभाग के मंसूबे पूरे नहीं
पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग कृषि में 15 और व्यावसायिक भूमि में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना चाहता था। विभाग का मानना था कि सबसे ज्यादा कृषि भूमि की रजिस्ट्री होती है। ऐसे में कृषि भूमि की दर बढ़ाने से अधिक राजस्व मिलेगा, लेकिन चार विधायक ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़े होने की वजह से अफसर 15 प्रतिशत दर बढ़ाने में कामयाब नहीं हो पाए।
इसी प्रकार देवनानी सहित अन्य विधायकों ने व्यावसायिक दरों में 35 प्रतिशत तक दरें बढ़ाने का सहमत नहीं थे, इस वजह से अफसरों को 15 प्रतिशत करनी पड़ी।
दरें बढ़ना आवश्यक नहीं
सरकार ने बजट में इस बार घोषणा की थी कि 30 सितंबर तक जिन जिलों में एक वर्ष में डीएलसी की बैठक नहीं हुई, वहां पर दस और एक वर्ष से अधिक होने पर 15 प्रतिशत दरों में स्वतः ही वृद्धि हो जाएगी। बैठक में विधायक शामिल नहीं होते तो दरों में अधिक वृद्धि होती, लेकिन विधायक चाहते तो वर्तमान दरों को यथावत भी रख सकते थे।
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