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संग्रहालय पहुंची चार सौ साल पुरानी तोप

9 वर्ष पहले
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अजमेर.सरवाड़ रियासत में राजपूत राजाओं की शक्ति का प्रतीक माने जाने वाली तोपें अब अजमेर के लोगों एवं यहां आने वाले सैलानियों को देखने को मिलेगी। सरवाड़ तहसील के कब्जे में रखी करीब 4 सौ साल पुरानी तोपों को राजकीय संग्रहालय को सौंप दिया गया है। संग्रहालय अधीक्षक आजम खान ने बताया कि सरवाड़ तहसील से साढ़े पांच तोपों को लाया गया है। इनमें चार तोप ठोस लोह, एक पीतल एवं एक अष्ट धातु से बनी हुई हैं। अष्ट धातु से बने तोप के बैरल को अज्ञात चोर आधा काट कर ले गए थे।


मध्यकालीन युग में तोप होती थी निर्णायक:

मध्य कालीन युग में तोप युद्ध में निर्णायक होती थीं। साथ राजाओं की शक्ति का भी प्रतिक मानी जाती थी। सरवाड़ का किला बहुत ही महत्वपूर्ण हुआ करता था। सुरक्षा की दृष्टि से तत्कालीन राजाओं ने तोपों को तैनात कर रखा था। खान ने बताया कि करीब 7 से 9 फुट लंबी तोप की बैरल हैं। इन्हें किले की सुरक्षा में लगा रखा था। इनकी मारक क्षमता 5 सौ मीटर से अधिक हुआ करती थी।


रियासतें समाप्त हुई तो हुआ उपयोग बंद:

रियासतें समाप्त होने के बाद किलों की दीवारों पर लगी तोपों का उपयोग बंद हो गया। वर्षों तक इनकी सुध नहीं ली गई। यहां आने वाले लोगों ने इन्हें नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। अष्ट धातु से बनी तोप को चोर आधा काटकर ही ले गए। इसके बाद जिला प्रशासन ने इन्हें सरवाड़ तहसील को सौंप दिया गया। करीब साढ़े तोपों को तहसील में रखा गया था।


तहसील से चोरी तोप का नहीं लगा सुराग:

सरवाड़ तहसील के कब्जे में रखी तोपों में एक तोप अज्ञात चोरी चुरा कर ले गए। करीब आठ से अधिक साल गुजर जाने के बाद भी जिला पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी है।