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डाउनलोड करेंअजमेर। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई के स्तर को लेकर बन गई है प्रोफाइल। कौन पढ़ाई में होशियार है और कौन है कमजोर। कौन है ऐसा जो पढऩा जानता है लेकिन लिखना नहीं। इन बच्चों की कैटेगरी भी कर दी गई है तय। पढ़ाई में होशियार विद्यार्थी की ग्रेड है 'ए' ठीक-ठाक की 'बी' तो फिसड्डी को 'सी' ग्रेड दी गई है। अब हर सप्ताह किया जा रहा है इनकी पढ़ाई का मूल्यांकन। देखा जा रहा है विद्यार्थी का स्तर बढ़ा या नहीं। स्तर बढऩे पर विद्यार्थी 'सी' से 'बी' और 'बी' से जा रहा है 'ए' ग्रेड में। शिक्षा के स्तर में सुधार नहीं होने पर संबलन अभियान की तरह ही रीडिंग कैंपेन में भी शिक्षकों पर गाज गिरनी है। लेकिन शिक्षा अधिकारियों से शिक्षक ज्यादा होशियार निकल गए हैं।
पढ़ाई के स्तर की कार्ययोजना बनाने के दौरान ही होशियार विद्यार्थियों को 'ए' की बजाय 'सी' ग्रेड में दर्शा दिया गया। कारण कि पहले सप्ताह में उसे 'बी' और उससे अगले सप्ताह में उस विद्यार्थी को 'ए' ग्रेड में दर्शाकर यह साबित कर सकें कि उसके पढ़ाई के स्तर में बढ़ोतरी कर दी गई है। यानी पढ़ाई में फिसड्डी रहने वाले विद्यार्थी को होशियार बना दिया गया है। ऐसे में शिक्षक भी खुश और रीडिंग कैंपेन में जांच करने के लिए स्कूल आने वाला अधिकारी भी खुश। लेकिन शिक्षकों की होशियारी जांच अधिकारियों की पकड़ में आने से बच नहीं पाई। एसएसए के अतिरिक्त परियोजना समन्वयक महावीर सिंह राठौड़ ने स्कूल में 'सी' ग्रेड में शामिल किए गए बच्चों से हिंदी व अंग्रेजी में पढ़ाया-लिखाया तो
कमजोर नहीं दिखे।
यह है उदाहरण : राबाउप्रावि राजाखेड़ी, किशनगढ़ में पांचवीं कक्षा में 12 विद्यार्थी हैं। इनमें से शिक्षकों ने 4 बच्चों को 'बी' व 'सी' ग्रेड में दर्शाया। एडीपीसी राठौड़ ने मौके पर जाकर इन बच्चों के शिक्षा का स्तर देखा तो मौके पर मौजूद 9 विद्यार्थियों में से पढऩे व लिखने में एक छात्र 'ए' और 8 विद्यार्थी 'बी' ग्रेड के निकले। इस होशियारी को लेकर राठौड़ ने लताड़ लगाते हुए कार्ययोजना में सुधार के निर्देश दिए। इसी प्रकार राउप्रावि मालियों की ढाणी, किशनगढ़ में बच्चों को सी ग्रेड में दर्शा दिया गया। कार्यक्रम सहायक अधिकारी भवानी सिंह राठौड़ ने शिक्षा स्तर की जांच की तो कक्षा 5 में ही 5 में से एक बच्चा ए ग्रेड और बाकी बी ग्रेड के काबिल मिले। एपीसी अरविंद सवासिया ने राबाउप्रावि रामसर की जांच की तो वहां पर न तो कार्ययोजना बनाई र्ग और न ही साप्ताहिक मूल्यांकन किया पाया गया।
इस कारण चलाना पड़ा रीडिंग कैंपेन : लगभग 18 हजार सरकारी स्कूलों का अवलोकन और आकलन किया गया। इसमें सामने आया कि बहुत से बच्चे अपनी कक्षा के स्तर के अनुरूप उस दक्षता स्तर पर नहीं है जो कि शिक्षाक्रम में अपेक्षा की गई है।
कार्रवाई की जाएगी
बच्चों की पढ़ाई के स्तर के मुताबिक ही ग्रेड देकर कार्य योजना बनाने की हिदायत दी गई थी। लेकिन स्कूलों में गलत ग्रेडिंग करने की बात जांच में सामने आई है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी। जिससे वस्तुस्थिति सामने आ सके और बच्चों के पढ़ाई के स्तर में सुधार हो सके। महावीर सिंह राठौड़, एडीपीसी फैक्ट फाइल
कक्षा 3, 4 व 5 के विद्यार्थियों को जांचा जाएगा पढ़ाई का स्तर।
: एक माह में 80 अधिकारी करेंगे जिले की 1205 स्कूलों का निरीक्षण।
: जिला स्तर के 16 अधिकारी करेंगे 225 स्कूलों का निरीक्षण।
: डाइट के 10 अधिकारी करेंगे 40 स्कूलों का निरीक्षण।
: ब्लाक के 54 अधिकारी करेंगे 540 स्कूलों का निरीक्षण।
यह है ग्रेड
ए- हिंदी और अंग्रेजी ठीक से लिखना व पढऩा, गणित की योग्यता कक्षानुसार।
बी- हिंदी अंग्रेजी अटक-अटककर पढऩा व लिखना, जोड़ बाकी गुणा भाग नहीं कर पाना।
सी- हिंदी अंग्रेजी लिखना- पढऩा नहीं आता, अंक की पहचान नहीं कर पाना।
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