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हाउसिंग बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीन के नियमन नहीं होंगे

9 वर्ष पहले
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अजमेर.नगरीय विकास विभाग की अनुमति नहीं मिलने से हाउसिंग बोर्ड द्वारा जनाना अस्पताल के पास अवाप्ति के लिए प्रस्तावित खातेदारी की जमीन के नियमन का मामला अटक गया है। न्यास ने बोर्ड की जमीन से जुड़ी नियमन की फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
हाउसिंग बोर्ड की ओर से जनाना अस्पताल के पास नई आवासीय कॉलोनी बनाने के लिए 700 बीघा भूमि की अवाप्ति प्रस्तावित है। इसके लिए बोर्ड ने कार्रवाई शुरू कर दी थी।
प्रशासन शहरों के संग अभियान के तहत नगरीय निकायों को सरकारी व अवाप्तशुदा भूमियों के नियमन करने की स्वीकृति मिलने से कुछ खातेदारों ने न्यास में जमीन के नियमन की फाइलें लगा दी। ये वे खातेदार है जिनकी जमीन हाउसिंग बोर्ड द्वारा अवाप्त की जाने वाली है।
न्यास ने ऐसे खातेदारों के आवेदनों का मसला हाउसिंग बोर्ड से जुड़ा होने के कारण नगरीय विकास विभाग को पत्र लिखकर नियमन की अनुमति मांगी। लेकिन न्यास को अनुमति नहीं मिली।
लिहाजा न्यास ने हाउसिंग बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीन से जुड़ी फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इससे हाउसिंग बोर्ड को राहत मिली अन्यथा उसे खातेदारों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती।
भूखंड शेष नहीं
इसके अलावा जमीन अवाप्त करने की कार्रवाई में भी अधिक समय लगता। इससे हाउसिंग बोर्ड की यह नई योजना लंबित हो जाती। गौरतलब है कि पिछले दस साल से बोर्ड ने अजमेर में कोई नई योजना नहीं बनाई है। अभी तक पुरानी योजनाओं के ही खाली भूखंडों को बेचकर बोर्ड अपना काम चला रहा था। लेकिन अब पुरानी योजनाओं में भी खाली भूखण्ड शेष नहीं रहे हैं।
पिछले चार- पांच साल से हाउसिंग बोर्ड ने नई आवासीय योजना के लिए जिला प्रशासन से सरकारी जमीन आवंटित किए जाने की मांग कर रहा है। लेकिन प्रशासन बोर्ड को सरकारी जमीन आवंटित करने में असमर्थ है।
वह पहले ही न्यास को अजमेर और पैराफेरी क्षेत्र की समस्त सरकारी जमीन आवंटित कर चुका है। इसके चलते हाउसिंग बोर्ड अजमेर में पहली बार अपने स्तर पर ही खातेदारों से जमीन अवाप्त कर रहा है।
अवगत कराया
'न्यास द्वारा की जा रही नियमन की कार्रवाई को रोकने के लिए मुख्यालय को अवगत करा दिया है। नियमन नहीं होता है तो अच्छी बात है।'
पी एम डिंगरवाल,
आवासीय अभियंता, बोर्ड
एनओसी जारी करें
'बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीन के नियमन करने की अनुमति नहीं मिल रही है। बोर्ड एनओसी जारी करता है तो नियमन किया जाएगा।'
केसी वर्मा,
सचिव, नगर सुधार न्यास