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आयुर्वेद निदेशक ने किया निरीक्षण, अस्पतालों में मची अफरा-तफरी

8 वर्ष पहले
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अजमेर. आयुर्वेद निदेशक आशुतोष गुप्ता के आकस्मिक निरीक्षण से विभागीय कार्मिकों में अफरा-तफरी मची हुई है। औषधालयों में भी चिकित्सक, कंपाउंडर व परिचारक निर्धारित वर्दी में नजर आने लगे हैं। वर्दी में नहीं पाए जाने वाले कार्मिकों को नोटिस थमाए जा रहे हैं। गुरुवार को मोबाइल यूनिट का आकस्मिक निरीक्षण किया तो चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष के 5 माह बीतने के बावजूद प्रदेश में एक भी निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन नहीं हो पाया है। प्रयोगशाला में औषधि परीक्षण से संबंधित मशीनरी का उपयोग नहीं होने का मामला भी निदेशक ने गंभीर माना।

जनाना अस्पताल के निकट मोबाइल यूनिट ने अप्रैल से अब तक एक भी शिविर नहीं लगाने को उन्होंने गंभीरता से लिया। प्रभारी डॉ. सुधाकर मिश्र का कहना था कि जिला आयुर्वेद अधिकारी के जरिए ही आयुर्वेद निदेशालय को प्रस्ताव भिजवाए जाते हैं। निदेशालय के निर्देश पर ही प्रदेशभर में एक वर्ष में 20 शिविर लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक शिविर के लिए राज्य सरकार से एक लाख रुपए आवंटित किए जाते हैं।

इस पर निदेशक ने उनसे से सभी जिला आयुर्वेद अधिकारियों से संपर्क कर शिविर की तारीखें तय कर निदेशालय को प्रस्ताव भिजवाने के निर्देश दिए। यूनिट में गंदे व पुराने गद्दों को नीलाम कर नए गद्दों के प्रस्ताव बनाने को कहा गया। पंचकर्म में निरीक्षण के दौरान औषधियों की कमी पाई गई, साथ ही मेडिकेटेड ऑयल नहीं पाया गया। इसको देखते हुए उन्होंने चिकित्सक भैरूलाल मीणा को व्यवस्था करने के निर्देश दिए। गुप्ता ने कहा कि पंचकर्म की तरफ लोगों के रुझान को देखते हुए इसे बेहतर तरीके से संचालन करने की हिदायत दी और दवाईयों की कमी नहीं आने देने का आश्वासन दिया।

आयुर्वेद रसायनशाला में निरीक्षण के दौरान निदेशक ने प्रयोगशाला में औषधि परीक्षण से संबंधित विभिन्न मशीनरी का समुचित उपयोग नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। पूछताछ में उन्हें बताया गया कि परीक्षण के लिए वांछित योग्यताधारी कार्मिक नहीं होने के कारण आयुर्वेद चिकित्सक दीपक शर्मा को प्रभारी के पद पर पदस्थापित किया हुआ है। मशीनरी के लिए कार्मिक लगाने का प्रस्ताव बनाकर निदेशालय को भिजवाने के निर्देश दिए गए।

औषधि निर्माण के लिए कच्ची औषधियों को उपयोग में लेने के बावजूद एक अप्रैल 2013 से कच्ची औषधि स्टॉक पंजिका में किसी प्रकार का इंद्राज नहीं होने से उन्होंने प्रभारी अधिकारी को फटकार लगाते हुए भविष्य में औषधि का इंद्राज करने की हिदायत दी।

आकस्मिक निरीक्षण का कार्यक्रम लगातार जारी रहेगा। उप निदेशक समेत अन्य अधिकारियों को भी औषधालयों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए है। विभागीय कार्यों व ड्यूटी में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिना वर्दी के कार्मिक के ड्यूटी पर पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आशुतोष गुप्ता. निदेशक