पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बैंच सदस्यों के नाम घोषित करने के फैसले का विरोध, आज रहेगी वकीलों की हड़ताल

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अजमेर। राजस्व मंडल के वकीलों ने अध्यक्ष नीलिमा जौहरी के मुकदमों की सुनवाई के एेन पहले बैंच सदस्यों के नाम घोषित करने के फैसले का विरोध किया है। रेवेन्यू बार अध्यक्ष सोहनपाल सिंह की अगुआई में बुधवार को करीब पचास वकीलों ने मंडल अध्यक्ष से मुलाकात कर पूर्व व्यवस्था बहाल करने की मांग की। मंडल अध्यक्ष के फैसले के विरोध में राजस्थान रेवेन्यू बार एसोसिएशन की साधारण सभा ने गुरुवार को न्यायिक कार्य के बहिष्कार की घोषणा की है।
इससे पहले वकीलों ने जौहरी को बताया कि बेंचों में सुनवाई करने वाले सदस्यों के नाम की घोषणा सुनवाई से एक दिन पहले होने की व्यवस्था पिछले कई सालाें से चल रही है। सुनवाई के एक दिन पहले शाम को करीब पांच से छह बजे के बीच यह तय हो जाता है कि अमुक बैंच मे अमुक सदस्य बैठेंगे और अमुक मुकदमों की सुनवाई करेंगे। कई बैंच स्थगित होती हैं तो उसकी जानकारी भी वकीलों को पहले हो जाती है।

इससे सदस्यों को भी यह मालूम होता है कि दूसरे दिन उन्हें किस बैंच में बैठना है और सुनवाई वाले दिन समय पर सुनवाई शुरू हो जाती है। अब नई व्यवस्था के तहत सुनवाई वाले दिन ही सुबह साढ़े दस से 11 बजे के बीच बैंच के लिए सदस्यों के नामाें की घोषणा होती है। इसके बाद सदस्यों व वकीलों को जानकारी होती है और बैंच लगने व अन्य कार्रवाई में तकरीबन एक घंटा लग जाता है। इसके चलते दोपहर 12 बजे तक सुनवाई शुरू होती है। इससे ना केवल पक्षकारों को नुकसान होता है बल्कि वकील भी मुकदमों की ठीक तरीके से तैयारी नहीं कर पाते हैं।
अध्यक्ष के रवैये पर भड़के
रेवेन्यू बार एसोसिएशन की साधारण सभा दोपहर करीब एक बजे आयोजित हुई। सभा में वकीलों ने एकमत से मंडल अध्यक्ष नीलिमा जौहरी के रवैये की निंदा करते हुए कहा कि प्रतिनिधि मंडल में बार कौंसिल के सदस्य, बार पदाधिकारी और वरिष्ठ वकील शामिल थे।
आरोप लगाया गया कि जौहरी ने चेयरमैन पद की गरिमा के अनुरूप वकीलों से व्यवहार नहीं किया और वे हठधर्मितापूर्ण रवैया अपनाते हुए अव्यवहारिक व्यवस्था थोपने पर आमादा हैं। वकीलों का कहना था कि जब हम जयपुर के वकीलों के समर्थन में 68 दिन न्यायिक कामकाज ठप कर सकते हैं तो अपनी मांग को लेकर भी आंदोलन चला सकते हैं।
वकीलों का कहना था कि हम हड़ताल के पक्षधर नहीं है लेकिन शायद मंडल की चेयरमैन वकीलों को काम करने देना नहीं चाहतीं है, इसलिए न्यायिक कामकाज का बहिष्कार वकीलों की मजबूरी बन गया है।
ये है विवाद का मुद्दा
राजस्व मंडल में कुछ समय पहले तक यह व्यवस्था थी कि वाद सूची जारी होने व मुकदमे की सुनवाई के एक दिन पहले ही ये तय हो जाता था कि अमुक मुकदमे की, अमुक बैंच में अमुक सदस्य द्वारा सुनवाई की जाएगी। यानी कि दैनिक वाद सूची पर एक दिन पहले ही बैंच वार सदस्यों के नाम तय कर दिए जाते थे। यह घोषणा राजस्व मंडल अध्यक्ष के क्षेत्राधिकार में होती है कि किस सदस्य को किस बैंच में रखा जाए।
मंडल में पांच से अधिक सिंगल बैंच के अलावा तीन डिवीजन बैंच गठित करने का प्रावधान है जो मुकदमों की सुनवाई करती है। एक दिन पहले वकीलों को यह सूचना मिल जाती थी कि अमुक बैंच में अमुक सदस्य मुकदमों की सुनवाई करेंगे। अब नई व्यवस्था के तहत जिस दिन मुकदमा दैनिक वाद सूची में आता है उसी दिन ठीक पहले यह मालूम होता है कि अमुक सदस्य इसकी सुनवाई करेगा।