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178 साल पुराने विश्वविद्यालय का नया नाम पृथ्वीराज चौहान महाविद्यालय होगा

7 वर्ष पहले
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अजमेर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में अजमेर के राजकीय महाविद्यालय (जीसीए) का नाम बदलकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। करीब 178 साल पुराना यह महाविद्यालय अब इसी नाम से जाना जाएगा। महाविद्यालय का नाम बदले जाने पर भारतीय जनता पार्टी आैर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सीएम का आभार जताया है।

भाजपा के शहर अध्यक्ष अरविंद यादव ने बताया कि राज्य की केबिनेट बैठक में जीसीए का नाम बदलकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय किए जाने का निर्णय लिया गया। भाजपा, कांग्रेस शासन काल से ही कॉलेज का नाम बदलने की मांग करते आ रही है। प्रदेश में भाजपा की सत्ता आने के बाद मुख्यमंत्री से मिलकर तत्काल कॉलेज का नाम बदलकर यशस्वी हिंदू सम्राट पृथ्वीराज के नाम पर किए जाने का आग्रह किया गया था। भाजपा नेताओं ने केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री सांवरलाल जाट, वरिष्ठ भाजपा नेता आेंकार सिंह लखावत, उच्च शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ, शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल का भी आभार जताया है। वहीं एबीवीपी महानगर मंत्री हंसराज चौधरी ने राज्य सरकार के इस फैसले का स्वागत कर सीएम को धन्यवाद ज्ञापित किया है। चौधरी ने बताया कि एबीवीपी लंबे समय से जीसीए का नाम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान के नाम पर करवाने के लिए प्रयासरत थी। कांग्रेस शासनकाल में इसके लिए आंदोलन किया गया था।
इतिहास के कोने से जीसीए
ब्रिटिश शासन काल में ब्ल्यू कैसल के नाम से पहचाने जाने वाले जीसीए में 178 वर्ष पूर्व सन् 1836 में ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशक ने अंग्रेजी स्कूल की स्थापना की थी। 1868 में यहां इंटर मीडिएट कक्षाएं प्रारंभ हुई। 17 फरवरी सन 1868 में राजपूताना के गर्वनर जनरल के एजेंट जनरल कीपिंग ने जीसीए की नींव रखी थी। नब्बे के दशक में अजमेर के लोगों द्वारा एकत्रित 44 हजार रुपए के चंदे की राशि से यहां डिग्री कॉलेज शुरू किया गया। विज्ञान संकाय यहां 1913 में प्रारंभ हुआ। जीसीए 1946 में पीजी कॉलेज बना। 1949 में यहां वाणिज्य आैर 1951 में विधि कक्षाएं प्रारंभ की गई। पूर्व में इस कॉलेज का एफीलिएशन कलकत्ता यूनिवर्सिटी से था, फिर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से हुआ। 1886 के बाद आगरा यूनिवर्सिटी से एफीलिएटेड हुआ। वर्ष 1956 में राजस्थान के एकीकरण के दौरान इस कॉलेज का एफीलिएशन राजस्थान यूनिवर्सिटी से हुआ। जीसीए वर्ष 1987 में अजमेर की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीएसयू) से एफीलिएट हुआ।
शिक्षा का स्तर सुधारा जाए, नाम बदलने से क्या होगा : इधर, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष लोकेश कोठारी का कहना है कि 178 सालों बाद ही क्यों भाजपा को जीसीए का नाम बदलने की आवश्यकता महसूस हुई। जबकि प्रदेश में कई बार भाजपा की सरकार रही है। तब ऐसा क्यों नहीं हुआ। नाम बदलने से कॉलेज का स्तर नहीं बदल सकता। इसके लिए कॉलेज में
पर्याप्त संसाधन जुटाने की जरूरत है।