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अब CEO और आयुक्त खुलवा सकेंगे सीज किए गए अवैध भवनों को

7 वर्ष पहले
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अजमेर। अजमेर नगर निगम के सीईओ और आयुक्त अब अवैध रूप से बने भवनों को सीज करने के साथ-साथ इन्हें फिर से खुलवा भी सकेंगे। राज्य सरकार ने इस संबंध में अधिकार दे दिए हैं। सीईओ के भवन नहीं खोलने के फैसले के खिलाफ भवन मालिक स्वायत्त शासन विभाग अथवा सरकार के यहां पर अपील कर सकता है।
सरकार के इस निर्णय के बाद अब भवन मालिकों को जयपुर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी। स्वायत्त शासन विभाग में लंबित प्रकरणों का निस्तारण होगा। यह आदेश प्रदेश की सभी निकायों पर भी लागू होगा। राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 194 के तहत राज्य सरकार ने निकायों के सीईओ और आयुक्तों को बगैर स्वीकृति अथवा अवैध रूप से बने निर्माणों को सीज करने का अधिकार दे रखा था।
धारा 327 के तहत होती थी अपील
भवन मालिक अधिकारी के आदेश के खिलाफ धारा 327 के तहत स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक अथवा सरकार में अपील करता था। निदेशक प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद खोलने अथवा दूसरे आदेश पारित करते थे। सरकार ने अब सभी निकायों के सीईओ अथवा आयुक्तों को सीज भवनों की सुनवाई का अधिकार भी दे दिया है। अब भवन मालिक सीधे स्वायत्त शासन विभाग में धारा 327 के तहत आदेश के खिलाफ अपील नहीं कर सकता है।
होगा ये फायदा
सरकार के इस फैसले से भवन मालिक के साथ निकायों को भी फायदा होगा। पहले भवन मालिक जयपुर अपील करता था। मामला लंबे समय तक चलता था। इसके अलावा भवन मालिक सांठ-गांठ करके फाइल जयपुर मंगवा लेता था अथवा फैसले के खिलाफ अस्थायी रोक का आदेश पारित करा लेता था। इससे लंबे समय तक फाइलें जयपुर में ही पड़ी रहती है।
फाइल नहीं होने की वजह से निकाय भी अतिक्रमी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाती थी। इसके अलावा निकायों के विधि अधिकारियों को जयपुर चक्कर लगाने पड़ते थे। नई व्यवस्था से अब अतिक्रमियों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। जानकार लोगों का कहना है कि अब सीईओ अथवा आयुक्त अपने फैसले में सीज भवन को नहीं खोलने के कारण भी लिखेगा। इसके चलते स्वायत्त शासन विभाग को भी फैसले करने से पहले सभी महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी रहेगी।
यह करना होगा
निकायों द्वारा भवन सीज करने पर भवन मालिक को सक्षम अधिकारी के यहां अपील करनी होगी। अपील में शपथ-पत्र सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, जिसमें भवन में नियम विरुद्ध किए गए निर्माण के बारे में जवाब देना होगा। अधिकारी संतुष्ट होने पर सीज भवन को खोलने अथवा सैट बैक में जुर्माना लेकर फैसला कर सकता है। अजमेर नगर निगम के सौ प्रकरण स्वायत्त शासन विभाग में लंबित हैं। सरकार के फैसले के बाद स्वायत्त शासन विभाग इन प्रकरणों को सुनवाई के लिए निगम को लौटा सकता है।
इनका कहना है कि-
' सरकार का फैसला निकायों के साथ भवन मालिकों को राहत देगा। निकायों को पैरवी करने के लिए जयपुर जाना पड़ता था। समय की बचत के साथ अतिक्रमियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। भवन मालिकों की सुनवाई अब अजमेर में हो जाएगी।'
-नारायणलाल मीणा, आयुक्त, नगर निगम