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डाउनलोड करेंअजमेर। अजमेर में काई से बायो फ्यूल बनाने के लिए शोध कार्य शुरू हो गया है। इसके लिए एमडीएस यूनिवर्सिटी में अल्गी बायोफ्यूल एवं बायोमोलिक्यूल इंटरडिस्प्लीनरी रिसर्च सेंटर (शैवाल जैव ईंधन एवं जैव अणु केंद्र) स्थापित किया गया है। अजमेर में देश का यह पहला सेंटर है, जहां काई से डीजल-पेट्रोल बनाने पर शोध किया जाएगा।
माइक्रो बायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष भटनागर ने बताया कि शोध प्रक्रिया के तहत 60 प्रतिशत गंदा पानी और 40 प्रतिशत साफ पानी का मिश्रण लेकर इसमें अल्गी (काई) को विकसित किया जाएगा।
सेंटर पर 14 प्रकार की काइयों पर शोध चल रहा है, जो शहर में बड़ी आसानी से मिल जाती हैं। इन काइयों में प्रदूषण कम करने की योग्यता और इनमें बायो डीजल बनाने की संभावना देखी जा रही है।
आगे की स्लाइड्स में जानें कैसे बनेगा काई से प्रट्रोल और डीजल
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