पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

फिर विवादों में मास्टर प्लान, पॉश कॉलोनी में पोल्ट्री फार्म, MLA के गंभीर आरोप

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अजमेर. अजमेर के मास्टर प्लान से जहां भू-माफियाओं के वारे-न्यारे हो गए हैं, वहीं खुद इसे तैयार करने वाले एडीए को इससे करोड़ों रुपए की चपत लग रही है। बावजूद इसके अफसर आंखें मूंदकर प्लान को लागू करने में लगे हैं। एडीए शहर की पॉश कॉलोनी हरिभाऊ उपाध्याय मुख्य नगर योजना में करोड़ों रुपए की बेशकीमती अवाप्त भूमि का कब्जा इसलिए नहीं ले पा रहा है, क्योंकि मास्टर प्लान में उसका भू उपयोग पोल्ट्री फार्म है।

एडीए चाहता तो भू-उपयोग परिवर्तन कर इस जमीन से करोड़ों रुपए की आय अर्जित कर सकता था। इधर, विधायक अनिता भदेल ने भी नगरीय विकास विभाग द्वारा वर्तमान मास्टर प्लान के प्रारूप को हरी झंडी देने के खिलाफ कड़े तेवर अख्तियार कर लिए हैं। भदेल ने मुख्य नगर नियोजक को दो दिन पूर्व लिखे पत्र में मास्टर प्लान के प्रारूप में रखी गई खामियों के साथ लोगों को उपकृत करने का आरोप भी लगाया है।
विधायक ने दिए घोटाले के उदाहरण
विधायक अनिता भदेल ने मास्टर प्लान के प्रारूप को लागू नहीं करने को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दो दिन पूर्व मुख्य नगर नियोजक को पत्र लिखकर मास्टर प्लान में हुए घोटाले के उदाहरण देते हुए सुझाव भी दिए हैं। भदेल के मुख्य आरोप यह हैं।
1 मास्टर प्लान 2023 में फॉय सागर सड़क के उत्तर एवं बीके कौल नगर के पश्चिमी सीमा प्रस्तावित भू-उपयोग अस्पताल, कॉलेज कार्यालय सहित अन्य कार्यों के लिए दिखा रखा था। वहीं 2033 के मास्टर प्लान में इसे आवासीय दिखाया गया है। वर्तमान में यहां पर काफी भूमि रिक्त है। इस फैसले से भू-माफियाओं को फायदा होगा।
2 मास्टर प्लान 2023 में अजमेर विकास प्राधिकरण की दीपक नगर योजना की भूमि का भू-उपयोग कार्यालय बताया गया है। लेकिन नए मास्टर प्लान में व्यावसायिक दिखाया है। प्राधिकरण ने योजना की जमीन अवाप्त कर रखी है, लोगों ने अवैध रूप से व्यावसायिक निर्माण कर लिए हैं। मास्टर प्लान में भू उपयोग व्यावसायिक होने से निर्माण वैध होने के साथ सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व से वंचित होना पड़ेगा। साथ ही भूमि अवाप्त करने पर खातेदारों को व्यावसायिक दर से भुगतान करना होगा।
3 मास्टर प्लान 2033 में सीकर सड़क पर पुष्कर बाइपास की दक्षिण दिशा में प्रस्तावित विश्वविद्यालय के एक एक तिहाई हिस्से को आवासीय दिखाया गया है। इससे प्रतीत होता है कि नगर नियोजन विभाग की भू- उपयोग विस्तार की गणना में गलती है।
शहर हित नजर अंदाज

वर्ष 2033 को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए मास्टर प्लान में शहर हितों के बजाय प्रभावशाली लोगों का ध्यान रखा गया है। एडीए की पुष्कर रोड पर हरिभाऊ उपाध्याय मुख्य नगर योजना है, जो कि पूर्ण रूप से विकसित हो चुकी है। यहां एक पोल्ट्री फार्म बना हुआ है, लेकिन वहां मुर्गी पालन नहीं हो रहा।
सरकार ने यह भूमि अवाप्त कर अवार्ड जारी किया। साथ ही यह एडीए की अधिसूचित योजना है, लेकिन मास्टर प्लान में इस भूमि का भू-उपयोग पोल्ट्री फार्म दिखाया है। भूमि मालिक ने भी एडीए में जमीन को अवाप्ति से मुक्त करने की मांग की है। नियमानुसार भरी आबादी में पोल्ट्री फार्म नहीं होना चाहिए, इससे आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ये दिए सुझाव

1. मास्टर प्लान 2023 मौजूद है। नए जुड़े गांवों का ही मास्टर प्लान 2033 बनाया जाना चाहिए।

2. समस्त प्रस्तावित सड़कों को अवाप्त और लागू करने का एक प्लान होना चाहिए। इसी के आधार पर भू-उपयोग की गणना की जानी चाहिए।

3. दरगाह क्षेत्र का अलग मिनी मास्टर प्लान बने।

4. मास्टर प्लान में टेढ़ी सड़कों को सीधी करने के लिए अलग से प्रस्ताव होना चाहिए।
इनका है कहना-
' मास्टर प्लान का प्रारूप शहर के विकास को ध्यान में रखकर नहीं बनाया गया है। इसके लागू होने से विकास बाधित होगा। इसमें जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। वर्तमान प्रारूप लागू नहीं हो, यह शहर हित में है। मुख्य नगर नियोजक को पत्र लिखा है। आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री से भी बात करूंगी।'

-अनिता भदेल, विधायक

' मेरी जानकारी में नहीं है कि मास्टर प्लान में भू-उपयोग पोल्ट्री फार्म के लिए दिखा रखा है। इसकी जांच कराई जाएगी। विधायक का पत्र नहीं मिला है। प्लान को लागू करने से पहले सभी पहलुओं पर गौर किया जाएगा।'
-मनीष चौहान, कमिश्नर, एडीए