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जिनका होना होना था प्रमोशन उन्हें ही ले लिया कमेटी में

8 वर्ष पहले
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अजमेर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने एक्स काडर के कर्मचारियों को मंत्रालयिक कर्मचारी संवर्ग में शामिल करने के लिए हर वो काम किया जो संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण संबंधी दिशा निर्देशों के खिलाफ हैं। जो पदोन्नत होने वाले थे उन्हें ही कमेटी में ले लिया, बैठक में तीन अन्य उन कर्मचारियों को भी शामिल किया जो पदोन्नत होने वाले थे, बोर्ड बैठक में प्रस्ताव अभी आया ही नहीं फिक्सेशन तक दे दिया।
राज्य सरकार 1988 में ही मना कर चुकी है कि एक्स कैडर को मंत्रालयिक संवर्ग में शामिल नहीं किया जा सकता। मंत्रालयिक कर्मचारी पदोन्नति का सफर 30 साल में पूरा करता है, एक्स कैडर उनसे पहले ही बॉस बनकर आ गया। संवर्ग बदलते ही नई नियुक्ति तिथि, पदोन्नति की स्थिति का निर्धारण अनिवार्य है।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में पिछले दिनों एक्स कैडर को मंत्रालयिक कर्मचारी संवर्ग में दी गई पदोन्नति में संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुला उल्लंघन किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। सरकार की मनाही के बावजूद इस संवर्ग को पदोन्नति देकर आरक्षण के नियमों की भी धज्जियां उड़ाई गई। चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिन लोगों को पदोन्नति दी जानी थी, उन्हें ही एक्स कैडर की समस्या के समाधान के लिए गठित समिति में शामिल कर लिया गया।
बोर्ड में एक्स कैडर का मुद्दा लंबे समय से चल रहा है। बोर्ड प्रबंधन ने प्रभावशाली कार्मिकों के प्रभाव में इस वर्ष जनवरी में एक्स काडर की समस्या के समाधान के लिए एक समिति का गठन किया। बोर्ड सचिव मिरजूराम शर्मा द्वारा गठित इस समिति में सचिव के अलावा विशेषाधिकारी (परीक्षा), वित्तीय सलाहकार नरेंद्र तंवर (जो अभी भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं), उपनिदेशक (संस्थापन), मंत्रालयिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, महामंत्री रणजीत सिंह, सचिव के निजी सचिव सत्यनारायण सांखला, वरिष्ठ स्टेनो राजेंद्र कुमार पारीक और वरिष्ठ स्टेनो गोविंद कोली को शामिल किया गया।
सांखला, पारीक और गोविंद कोली एक्स कैडर के कर्मचारी थे, ऐसे में इस समिति में तीनों को शामिल किया जाना ही संदेह पैदा करता है। खास कर तब जबकि इन तीनों को पदोन्नति का लाभ भी मिलना था। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस समिति की जो बैठक हुई उसमें एक्स कैडर के तीन और कर्मचारियों अनिल बिसावा, धीरेंद्र शर्मा और इंदू चौधरी को शामिल कर लिया।
ऐसा माना जा रहा है कि बोर्ड प्रबंधन यह मानकर चल रहा था कि यदि इस मुद्दे पर यदि मतदान की जरूरत पड़ी तो एक्स कैडर के कर्मचारियों का बहुमत होना चाहिए। समिति तो बनी थी केवल नौ सदस्यों की और समिति की अनुशंसा पर 12 सदस्यों के साइन हो रखे हैं। इन तीनों को भी पदोन्नति दी जानी थी।
सरकार 1988 में ही मना कर चुकी
बोर्ड द्वारा 1988 में कार्मिक व प्रशासन विभाग से वरिष्ठता निर्धारित करने के संबंध में मार्गदर्शन मांगा था। सरकार ने मना कर दिया था। सरकार की ओर से तत्कालीन उपशासन सचिव एपी जोशी ने जो जवाब भेजा उसमें बताया गया कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कर्मचारी सेवा विनियम के परिशिष्ठ (सी) में अनुभागाधिकारी का पद प्रवर सहायक से शत प्रतिशत पदोन्नति से भरने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में निजी सहायक से अनुभागाधिकारी के पद पर स्थानांतरण नियमों के प्रतिकूल है, जो नहीं किया जा सकता।
इनका कहना है
॥अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल एक्स कैडर के मुद्दे पर मिला था। उन्होंने ज्ञापन भी दिया है। इन कार्मिकों को अपनी आपत्तियां ओएसडी व लीगल सेल को देने के लिए कहा है। पूरे दस्तावेज देखने के बाद ही पता लग सकेगा कि मामले में क्या हो सकता है।
डॉ. पीएस वर्मा, अध्यक्ष,राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
मनमर्जी से बनाई गई
चयन समितियां
अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ ने बोर्ड प्रबंधन पर आरोप लगाए हैं कि मनमर्जी से ही चयन समितियां बनाई गईं। बोर्ड द्वारा जारी अंतर वरिष्ठता सूची में राजेंद्र पारीक व गोविंद प्रसाद कोली के सामने चयन तिथि ही अंकित नहीं हैं।
ये पहुंचे थे ज्ञापन देने
अनुसूचित जाति, जनजाति कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष राजेश निर्वाण, महामंत्री रवि शंकर, रवि बंजारा, दिनेश उदय आदि यह ज्ञापन देने पहुंचे।