अजमेर। नरेंद्र तंवर ने बोर्ड की एफडीआर भुनाकर उसका पैसा पहले अपने भाई के खाते में ट्रांसफर किया और फिर वहां से अपने बैंक खातों में मंगवा लिया। एसीबी से पूछताछ में तंवर ने यह खुलासा किया कि उसने बोर्ड का साढ़े छह करोड़ रुपए बेंगलुरु के मडिकेरी में व्यवसाय करने वाले अपने भाई मोहन तंवर की फर्म के खाते में जमा कराए और फिर वहां से यह रकम उसके कई खातों में ट्रांसफर होती रही।
15 मार्च को जब एसीबी ने तंवर के आवास पर छापा मारा था तो माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की करोड़ों रुपए की एफडीआर मिली थी। इसके साथ ही विभिन्न बैंकों की रसीदें और उनमें जमा राशि के बारे में भी जानकारी हुई थी। शुरूआती पूछताछ में करोड़ों रुपए के हिसाब किताब के बारे में तंवर ने उन्हें बताया कि कर्नाटक में बुटीक चलाने वाले उसके भाई ने रुपए भिजवाए हैं।
तंवर ने अपने भाई से करीब दो करोड़ रुपए उधार लेना बताया। तंवर ने बताया कि उसका भाई मोहन तंवर बेंगलुरु के पास मडिकेरी में विवाह बुटीक के नाम से व्यवसाय करता है। वह अपने भाई के पास कभी गया नहीं लेकिन मोहन ने करीब दो करोड़ रुपए उसके बैंक खातों में जमा कराए हैं।
एसीबी को बात गले नहीं उतरी और आगे पूछताछ में तंवर ने सारा भेद खोल दिया। उसने बताया कि बोर्ड के खाते से साढ़े छह करोड़ रुपए के चेक काटकर शांति ट्रेडिंग के खाते में जमा कराए, यह फर्म उसके भाई मोहन की है। फिर उसने यह रकम अपने आईडीबीआई, आईसीआईसीआई, पीएनबी, बीओबी के खातों में जमा कराई। बोर्ड के खातों से चेक जारी होने व भुगतान के लिए अलग अलग राशि के हिसाब से अधिकारियों की जिम्मेदार तय थी। लेकिन एफए के नाते तंवर ने चेक काटने की जिम्मेदारी ली हुई थी।
उसकी गैर मौजूदगी में ही सचिव मिरजूराम शर्मा को चेक काटने का अधिकार था। एसीबी ने बोर्ड में वित्तीय लेनदेन की पूरी प्रणाली का अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है। फर्मो को चेक देने के नाम सेल्फ के चेक ले लिए गए।
यहां तंवर ने बोर्ड के अधिकारियों की लापरवाही का जमकर फायदा उठाया। परीक्षा संबंधी कार्य के भुगतान के लिए गोपनीय नाम आते थे उसका भी तंवर ने फायदा उठाया और उनके चेक की रकम अपने भाई के खाते में जमा करवा दी। गोपनीय फर्म को भुगतान की आड़ में तंवर ने लंबा खेल खेला था लेकिन जरूरत से ज्यादा पैसे का प्रदर्शन ने उसे फंसा दिया।
तंवर की पत्नी मंजू यूं तो गृहिणी है लेकिन तंवर ने उसका इन्कम टैक्स रिटर्न भरवाया हुआ है जिसमें दो लाख रुपए सालाना आय बताई है। वहीं जयपुर में स्थित दो मकान मंजू के नाम से खरीदे गए हैं, जिनकी फर्निशिंग पर ही पचास लाख से ज्यादा खर्च हुए हैं।
हालांकि एक मकान के बारे में तंवर ने बताया कि उसका सौदा निरस्त हो गया। मंजू के बैंक खातों में भी लाखों रुपए जमा थे, जिनके बार में तंवर कोई हिसाब किताब नहीं बता पाया। मंजू के एक खाते का बैलेंस तो 33 लाख 26 हजार रुपए था। मंजू ने जयपुर में ऐश आराम की चीजें और तीन एसी भी खरीदे थे।
करोड़ों की हेराफेरी फिर भी पर्सनल लोन : नरेंद्र तंवर भले ही करोड़ों रुपए की हेराफेरी कर अकूत संपत्ति हासिल कर चुका हो, लेकिन दिखाने के नाम पर वह डेढ़-दो लाख रुपए के पर्सनल लोन भी ले लेता था। बोर्ड परिसर स्थित बैंक में उसका जो खाता था उसमें वह छोटे मोटे लेनदेन ही करता था।