अजमेर। ख्वाजा साहब के 801 वें उर्स का पैगाम देश के विभिन्न हिस्सों में देते आए कलंदर व मलंग शनिवार को जुलूस के रूप में दरगाह पहुंचे। गाजेबाजे व ढोल ढमाकों के साथ निकले जुलूस में कलंदर व मलंग हैरतअंगेज करतब पेश करते हुए चल रहे थे। जुलूस की अगुवाई गुदड़ीशाह खानकाह के हजरत इनाम हसन गुदड़ीशाह बाबा कर रहे थे। गंज स्थित उस्मानी चिल्ले से शाम करीब 4 बजे कलंदर व मलंगों के जुलूस की शुरूआत हुई।
सबसे आगे हैरत अंगेज करतब पेश करने वाले कलंदर थे और उनके पीछे कलियर शरीफ से आए कलंदरों का जत्था। सबसे आगे चल रहे कलंदर सिर पर चिमटा मार कर, शरीर पर कोड़े बरसा कर, सिर में खम गढ़ा कर और तलवार की नोक से आंख का हीरा बाहर निकालने जैसे करतब पेश कर रहे थे। इनके पीछे विभिन्न रंगों के झंडे लिए मलंग व कलंदर चल रहे थे। असम, कलियर शरीफ, कोलकाता, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के विभिन्न जत्थे जुलूस में शामिल थे।
कुछ महिला कलंदर व मलंग भी साथ थीं। जुलूस के पीछे इनाम हसन गुदड़ीशाह की अगुवाई में अकीदतमंद का एक जत्था सिर पर मखमल की चादर और फूलों की टोकरी लिए हुए चल रहे थे। जुलूस गंज, देहली गेट, धानमंडी और दरगाह बाजार होते हुए रोशनी के वक्त से पूर्व दरगाह पहुंचा। यहां खादिमों द्वारा जुलूस का स्वागत किया गया।
जगह-जगह हुआ स्वागत
स्वागत का सिलसिला चिल्ले से ही शुरू हो गया था। गंज में गुरुद्वारे के सामने, स्टार क्लब की ओर से, देहली गेट के बाहर समेत विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। अजान होते ही रुक गया जुलूस : जब जुलूस देहली गेट के पास पहुंचा, उस समय मस्जिद घोसियान में अस्र की अजान शुरू हो गई। अदब में सभी कलंदर व मलंगों ने हैरत अंगेज करतब रोक दिए। कुछ देर जुलूस रुका रहा। इस दौरान अनेक कलंदर व मलंग अपने साथ लाए झंडों के साथ सड़क पर ही विश्राम के लिए बैठ गए।
दम मदार बेड़ा पार
जुलूस में शामिल कलंदर व मलंग दम मदार बेड़ा पार, या अली कर मदद समेत विभिन्न सदाएं लगाते हुए चल रहे थे। इधर कई कलंदर ढोल नगाड़ों की थाप पर झूमते हुए चल रहे थे। गोटों की मालाओं से स्वागत : दरगाह के निजामगेट पर गरीब नवाज सूफी मिशन सोसायटी के सदर शेखजादा जुल्फिकार चिश्ती, सैयद तौकीर चिश्ती, अस्मत बीबी और आले हुसैन आदि ने कलंदर व मलंगों के प्रमुखों को गोटे की माला पहना कर स्वागत किया। पुष्प वष्र की गई।
मिली राहत
इधर जैसे ही जुलूस देहली गेट के पास पहुंचा, उसी समय कुछ देर के लिए सूर्य बादलों की ओट में छिप गया। धूप में तपिश नहीं होने और हवाओं का असर बना रहने से कलंदर व मलंगों ने राहत की सांस ली। जुलूस के प्रारंभ में तेज धूप का दौर बना हुआ था। इधर चिल्ले पर सभी कलंदर व मलंगों का माला पहना कर स्वागत किया गया।