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ख्वाजा की दरगाह में बढ़ने लगी जायरीन संख्या, राज्यपाल की ओर से चादर पेश

8 वर्ष पहले
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अजमेर। ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 801 वें उर्स के मौके पर रविवार को दरगाह परिसर में हर तरफ चिश्तिया रंग छाया नजर आया। शहनाई वादन और सूफियाना कलामों पर आशिकान ए ख्वाजा झूमते नजर आ रहे हैं। जियारत के लिए भी अब लंबी कतार लगना शुरू हो गया है।
जुलूस के रूप में चादर लेकर आने वाले जायरीन की संख्या भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। आज सुबह से ही दरगाह परिसर में कव्वालियों की गूंज थी। अहाता ए नूर में शाही कव्वालों के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों से आए कव्वाल गरीब नवाज की शान में मनकबत के नजराने पेश करते नजर आए। कव्वालियां सुनने के लिए अहाता ए नूर में आशिकान ए ख्वाजा की भीड़ लगी थी। मनपसंद कलामों को सुन कर अकीदतमंद झूमते नजर आए।
कव्वालों को नजराना पेश करने की होड़ भी लगी रही। इधर पायंती दरवाजे के सामने बैठी अलग कव्वाल पार्टी के सामने भी अकीदतमंद की भीड़ लगी थी। वजीर अली दालान के सामने ही बाहर से आए शहनाई वादक सूफियाना कलामों की दिलकश धुनें बिखेर रहे थे। शहनाईवादन को सुनने के लिए खासी तादाद में लोग जमा थे। तेज धूप की भी जायरीन को परवाह नहीं थी। इधर देश के विभिन्न हिस्सों से आए जायरीन का दिन भर तांता लगा रहा। जन्नती दरवाजे के बाहर दूसरे दरवाजों की तुलना में अधिक भीड़ नजर आई। लोग सिर पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल लिए अपनी बारी का इंतजार करते नजर आए।
इधर बाबा फरीद गंज शक्कर के चिल्ले की दीवारों को चूमने, लच्छा बांधने और देगों में नजराना पेश करने का सिलसिला भी लगा रहा। इधर शाम को रोशनी की दुआ में आशिकान ए ख्वाजा की भीड़ उमड़ी। रोशनी का डंका बजते ही जो जहां था वो वहं रुक गया और दुआ के लिए हाथ उठा लिए।