अजमेर। ख्वाजा साहब के उर्स के मौके पर रविवार को पूर्व उपप्रधानमंत्री एलके आडवाणी और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी की ओर से चादर पेश की गई। भाजपा नेता अभिमन्यु सिंह की अगुवाई में पार्टी नेता व कार्यकर्ता यह चादर लेकर आए।
अभिमन्यु सिंह के साथ विधायक हबीबुर्रहमान, पूर्व विधायक जगजीत सिंह, मगरा विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मदनसिंह रावत, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष सैयद इब्राहीम फख्र, देवेंद्र सिंह, वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सलावत खां सहित अन्य लोग ये चादर लेकर पहुंचे।
आडवाणी की चादर सैयद अफशान चिश्ती ने पेश कराई और गडकरी की चादर सैयद बारी चिश्ती ने पेश कराई। अतिथियों को बारी ने जियारत कराई। सिंह ने जायरीन के नाम आडवाणी व गडकरी के संदेश पढ़े। दोनों ने जायरीन को उर्स की मुबारकबाद दी और कौमी एकता की मजबूती के लिए कामना की।
बॉलीवुड की ओर से चादर आज
गरीब नवाज के उर्स के मौके पर सोमवार को बॉलीवुड की ओर से भी चादर पेश की जाएगी। इस मौके पर स्थानीय रंगमंच से जुड़े कलाकार भी भाग लेंगे। गरीब नवाज समिति के सैयद कुतुबुद्दीन सखी के मुताबिक सुबह दरगाह के निजामगेट से जुलूस के रूप में चादर ले जाई जाएगी। आस्ताना शरीफ में यह चादर पेश कर अमन व भाईचारे की मन्नत मांगी जाएगी। बॉलीवुड के विभिन्न कलाकारों की ओर से जगह जगह उर्स की मुबारकबाद के बैनर लगाए गए हैं।
कलाकारों ने की जियारत
फिल्म कलाकार राजेश झांजी, तेजा बो पोतदार, एसके गजानन, चिंतन और सुरेंद्र क्षत्रिय आदि ने रविवार को ख्वाजा साहब की दरगाह में हाजिरी दी। उन्होंने गरीब नवाज की मजार पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल पेश कर मन्नत मांगी। इन कलाकारों को खादिम सैय्यद फजले अमीन चिश्ती ने जियारत कराई।
आस्था ने की जियारत
टीवी आर्टिस्ट आस्था ने रविवार को ख्वाजा साहब की दरगाह में हाजिरी दी। उन्होंने गरीब नवाज की मजार पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल पेश कर कामयाबी की मन्नत मांगी। उन्हें खादिम सैयद मुकद्दस मोईनी ने जियारत कराई।
आरती छाबड़िया ने की जियारत
सिने तारिका आरती छाबड़िया ने रविवार को ख्वाजा साहब की दरगाह में हाजिरी दी। उन्होंने गरीब नवाज की मजार पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल पेश कर कामयाबी की मन्नत मांगी। गरीब नवाज के 801 वें उर्स के मौके पर हाजिरी देने वाली वह पहली सिने तारिका हैं। वे दोपहर करीब 12 बजे जियारत को पहुंचीं।
परिसर में अनेक प्रशंसकों ने उन्हें पहचान लिया। खादिम सैयद कुतुबुद्दीन सखी ने उन्हें जियारत कराई। उन्होंने जन्नती दरवाजे को देखा और दुआ की।