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सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का 801वां उर्स शुरू

8 वर्ष पहले
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अजमेर। सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती का 801वां उर्स शनिवार रात से शुरू हो गया। रजब का चांद दिखाई देने की सूचना मिलते ही दरगाह में शादियाने बजाए गए और बड़े पीर साहब की पहाड़ी से तोप के गोले दागे गए। रात से ही दरगाह में उर्स की धार्मिक रस्में शुरू हो गईं।
हिलाल कमेटी द्वारा जैसे ही चांद दिखाई देने की घोषणा की गई, दरगाह में शादियाने बजाए गए और तोप के गोले दागे गए। लोगों ने एक दूसरे को रजब का चांद दिखाई देने की मुबारकबाद दी। मगरिब की नमाज के बाद दरगाह में हिलाल कमेटी की बैठक हुई।
शहर में आंधी और बारिश के चलते आकाश साफ नहीं था। इसके चलते यहां चांद दिखाई नहीं दिया। इसे देखते हुए कमेटी ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संपर्क किया और कपासन में रजब का चांद दिखाई देने की शहादत हिलाल कमेटी को मिली। इस आधार पर यहां भी चांद मान लिया गया।
कुल 17 को : उर्स के कुल की रस्म 17 मई को अदा की जाएगी। इस बार कुल और उर्स के दौरान अदा की जाने वाली जुमे की नमाज एक दिन ही है। बड़ा कुल 20 मई को होगा और इसके साथ ही उर्स का समापन हो जाएगा।
पहली महफिल हुई, गुस्ल दिया गया
रात को दरगाह स्थित महफिल खाना में दरगाह दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन की सदारत में उर्स की पहली महफिल हुई। शाही कव्वाल असरार हुसैन और साथियों के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से आए कव्वालों ने कलाम पेश किए। मध्य रात्रि के बाद दरगाह दीवान दौराने महफिल से उठ कर जन्नती दरवाजे होते हुए आस्ताना शरीफ पहुंचे और गरीब नवाज की मजार को पहला गुस्ल दिया।
महफिल खाना में विभिन्न दरगाहों के सज्जादगान और जायरीन मौजूद थे। इधर उर्स में आने वाले जायरीन की आवक तेज हो गई। अजमेर. ख्वाजा साहब के 801वें उर्स के पहले दिन शनिवार देर रात महफिलखाने में महफिल का आयोजन किया। शाही महफिल की सदारत दरगाह दीवान जैनुअल आबेदीन के पुत्र नसीरुद्दीन ने की।