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सॉफ्टवेयर से बोर्ड की साख दांव पर, मेरिट में 42 नंबर तक कम जुड़े

9 वर्ष पहले
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अजमेर.सॉफ्टवेयर ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की साख दांव पर लगा दी है। गड़बड़ी भी इतनी बड़ी की मेरिट में आए छात्रों के 42 नंबर तक कम जुड़े। साख बचाने के लिए बोर्ड ने गुपचुप स्थायी मेरिट जारी की।
किसी को कानों कान खबर न लगे इसलिए स्थायी मेरिट अखबारों को दी ही नहीं गई। विद्यार्थियों को अपने स्तर पर ही सूचित कर दिया। गड़बड़ी ऐसी रही कि मुख्य परिणाम के साथ बोर्ड ने जो अस्थायी मेरिट जारी की थी उसमें भारी उलट फेर हो गया। तीन बच्चे मेरिट से बाहर हो गए, चार नए जुड़ गए। कुछ के स्थान ही बदल गए।
बोर्ड ने प्रवेशिका परीक्षा 2012 का परिणाम 2 जून 2012 को घोषित किया था। इसके साथ जारी अस्थायी मेरिट सूची में अजमेर के धर्मराज जाट ने पहला स्थान प्राप्त किया था। धर्मराज समेत बोर्ड ने 10 प्रतिभावान विद्यार्थियों की मेरिट सूची जारी की थी।
सामान्यत: बोर्ड दिसंबर में स्थायी मेरिट जारी कर देता है। ऐसा इसलिए ताकि पुनर्गणना आदि की प्रक्रिया में यदि किसी के नंबर घटते बढ़ते हैं तो बदलाव की गुंजाइश रहे।
बोर्ड ने अन्य विषयों की स्थायी मेरिट तो जारी कर दी, लेकिन प्रवेशिका की जारी नहीं की। बोर्ड ने गुपचुप 14 दिसंबर को
स्थायी मेरिट सूची जारी कर दी। बोर्ड ने अखबारों को इसकी जानकारी भी नहीं दी। लेकिन बोर्ड के आधिकारिक सूत्रों ने चौंकाने वाली जानकारी दी है।
सूत्रों के अनुसार बोर्ड ने जो सॉफ्टवेयर तैयार किया था उसमें भारी गड़बड़ थी। जिसकी वजह से परीक्षार्थियों के वास्तविक नंबर नहीं जुड़े। नंबरों में भी ऐसा घालमेल कि एक दो नहीं बल्कि 42 नंबर तक नहीं जुड़ पाए। जाहिर है बोर्ड अपनी इस बड़ी गलती को सार्वजनिक कर साख पर बट्टा लगवाना नहीं चाहता था।
इस संवाददाता ने बोर्ड की स्थायी और अस्थायी मेरिट में शामिल विद्यार्थियों के प्राप्तांकों से तुलना की तो अस्थायी मेरिट में अधिकतम प्राप्तांक 486 थे जबकि स्थायी में अधिकतम प्राप्तांक 524 हो गए, न्यूनतम यानी दसवें स्थान पर 460 प्राप्तांक वाला विद्यार्थी था जो कि स्थायी मेरिट में न्यूनतम प्राप्तांक 473 हो गए हैं यानी न्यूनतम मेरिट वाले विद्यार्थी के भी 13 प्राप्तांक ज्यादा हैं।
अजमेर का धर्मराज अस्थायी मेरिट में पहले स्थान पर था, स्थायी में तीसरे स्थान पर आ गया। उसके 486 प्राप्तांक थे, स्थायी मेरिट 512 अंक प्राप्त किए हैं। यानी उसके 26 अंक बढ़े। स्थायी मेरिट में निधि सिंह ने 524 अंक प्राप्त कर पहला स्थान प्राप्त किया है।
अस्थाई मेरिट में निधि 482 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर थी। स्थायी मेरिट में उसके अंक 524 हो गए हैं। यानी 42 अंक जुड़े और वह पहले स्थान पर आ गई। उसने सबको पीछे पछाड़ कर पहला स्थान प्राप्त किया।
इनके स्थान हुए डिस्टर्ब
अस्थाई मेरिट में रोहित जांगिड़ दूसरे नंबर पर थे, लेकिन स्थायी मेरिट में इसका नंबर अब 8 वां हो गया है। रोहित के अस्थाई और स्थायी मेरिट में 483 अंक ही हैं। महेंद्र कुमार भगत 474 अंकों के साथ अस्थाई मेरिट में चौथे स्थान पर था।
स्थाई मेरिट में भगत 513 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर आ गया है। नाजिया परवेज अस्थाई मेरिट में 473 अंकों के साथ पांचवे स्थान पर था, लेकिन स्थाई मेरिट में उसका स्थान पांचवां ही है, लेकिन प्राप्तांक बढ़ कर 496 हो गए।
अस्थाई मेरिट में सीताराम जाट 467 अंकों के साथ छठे स्थान पर था। लेकिन अब 497 अंकों के साथ स्थाई मेरिट में 4 चौथे स्थान पर आ गया है। अस्थाई मेरिट में भावना गुर्जर 466 अंकों के साथ 7 वें नंबर पर रही थीं, लेकिन स्थाई मेरिट सूची में वे 493 अंकों के साथ छठे स्थान पर आ गई हैं। अस्थाई मेरिट सूची में 10 स्थानों पर 10 ही परीक्षार्थी आए थे। स्थाई मेरिट में 11 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए हैं।
ये मेरिट से गायब
अस्थाई मेरिट सूची में हेमंती नंदन 464 अंकों के साथ 8 वें स्थान पर, छोटी 463 अंकों के साथ नवें स्थान पर और डोली तिवारी 460 अंकों के साथ 10 वें स्थान पर थे। स्थायी मेरिट में इनके नाम नहीं हैं।
ये हुए नए शामिल
बोर्ड द्वारा जारी स्थायी मेरिट सूची में दीपा शर्मा 487 अंकों के साथ सातवें स्थान पर, नीतू विश्वास 479 प्राप्तांक के साथ नवें पर, आशीष धाबाई भी इतने ही अंकों के साथ संयुक्त रुप से नवें स्थान पर और अंकित शर्मा 473 अंकों के साथ 10 वें स्थान पर आए हैं।
23 से 42 अंक तक बढ़े
बोर्ड द्वारा जारी स्थाई मेरिट सूची के मुताबिक नाजिया परवेज के 23 अंक, धर्मराज जाट के 26 अंक, भावना गुर्जर के 27 अंक, सीता राम जाट के 30 अंक, महेंद्र कुमार भगत के 39 अंक और निधि सिंह के 42 अंक बढ़े हैं।
5 हजार 207 फेल हुए थे
प्रवेशिका परीक्षा में कुल 8 हजार 332 परीक्षार्थियों में से 5 हजार 207 फेल हो गए थे। इनमें से मात्र 3 हजार 125 परीक्षार्थी ही उत्तीर्ण हो सके थे। इस तरह की स्थिति पहले भी सामने आ चुकी है।
पूरा परिणाम ही संदेह के घेरे में
बोर्ड सूत्रों के मुताबिक सॉफ्टवेयर में आई तकनीकी गड़बड़ी का पता पुनर्गणना के लिए आए आवेदनों की जांच के दौरान ही लगा। लेकिन प्रवेशिका के सभी परीक्षार्थियों ने पुनर्गणना के लिए आवेदन नहीं किया। ऐसे में लगता है पूरा परिणाम ही संदेह के घेरे में बताया जा रहा है।
तकनीकी प्रॉब्लम से हुई गड़बड़ी
'प्रवेशिका परीक्षा में परिणाम के सॉफ्टवेयर में आई तकनीकी गड़बड़ी के चलते यह समस्या आई। इसे सही करा दिया गया है। स्थाई मेरिट के बाद सभी विद्यार्थियों को व्यक्तिश: अवगत कराया गया है। अन्य विषयों के परिणामों में कोई गड़बड़ी नहीं है।'
मिरजूराम शर्मा
सचिव, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर