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RPSC में अध्यक्ष न होने का पड़ा असर, स्थगित करना पड़ा साक्षात्कार

7 वर्ष पहले
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अजमेर. राजस्थान लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष के नहीं होने से कामकाज पर असर पड़ना शुरू हो गया है। मंगलवार को इंटरव्यू बोर्ड का गठन नहीं हो सका। इसके चलते खनिज एवं भू-वैज्ञानिक विभाग में सहायक खनि अभियंता (एएमई) पदों के साक्षात्कार ऐन वक्त पर स्थगित करने पड़े। साक्षात्कार के लिए पहुंचे अभ्यर्थियों को निराश लौटना पड़ा।

आयोग अध्यक्ष हबीब खान गौराण ने सोमवार शाम को पद से इस्तीफा दे दिया था। गौराण के कार्यालय नहीं पहुंचने से आयोग का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ। तयशुदा कार्यक्रम के तहत मंगलवार सुबह 9 बजे से एएमई पदों के लिए 19 अभ्यर्थियों के साक्षात्कार होने थे।
साक्षात्कार के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों से अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए पहुंच चुके थे। इधर, आयोग प्रबंधन के समक्ष संकट खड़ा हो गया। कारण, आयोग में होने वाले साक्षात्कार के लिए प्रतिदिन इंटरव्यू बोर्ड का गठन अध्यक्ष करता है। इसमें 2 से 3 सदस्य हो सकते हैं। अध्यक्ष नहीं होने से इंटरव्यू बोर्ड का गठन नहीं हो सका।
सदस्यों और सचिव में हुई मंत्रणा

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग सदस्य डॉ. आरडी सैनी, सुरजीतलाल मीणा और केआर बगड़िया के साथ सचिव नरेश कुमार ठकराल ने इस संबंध में चर्चा की, लेकिन नियमों के अनुसार इंटरव्यू बोर्ड के गठन का अधिकार अध्यक्ष को ही है। ऐसे में बोर्ड गठित नहीं किया जा सका। एक-डेढ़ घंटे बाद आयोग ने साक्षात्कार स्थगित के संबंध में अभ्यर्थियों को सूचना दी।
कार्मिक विभाग से मांगा मार्गदर्शन
आयोग प्रबंधन की ओर से सुबह ही इस संबंध में डीओपी से संपर्क साधा गया। डीओपी की ओर से भी आयाेग को जवाब मिला कि यदि बोर्ड गठन के संबंध में पूर्व में कोई लिखित आदेश हों, तो उसके आधार पर ही कार्यवाही आगे बढ़ा ली जाए, लेकिन खोजने पर भी कोई लिखित आदेश नहीं मिले। अध्यक्ष मौखिक तौर पर ही इंटरव्यू बोर्ड का गठन करते हैं। ऐसे में डीओपी ने भी साक्षात्कार नहीं लेने की सलाह दी।

दो दिन के साक्षात्कार किए स्थगित

आयोग सचिव नरेश कुमार ठकराल ने बताया कि आयोग द्वारा 23 एवं 24 सितंबर 2014 को आयोजित होने वाले सहायक खनिज अभियंता के साक्षात्कार अपरिहार्य कारण से स्थगित कर दिए हैं।साक्षात्कार की आगामी तिथि अभ्यर्थियों को यथा समय सूचित कर दी जाएगी।
32 पदों के लिए हो रहे हैं साक्षात्कार :
आयोग की ओर से एएमई के 32 पदों के लिए साक्षात्कार 15 सितंबर से शुरू किए गए थे। यदि साक्षात्कार समय पर पूरे हो जाते तो बुधवार रात तक परिणाम घोषित हो जाता, लेकिन अब इसका असर परिणाम पर भी पड़ेगा।
कॉमर्स परीक्षा पर संकट के बादल
पूर्व में निरस्त प्राध्यापक स्कूल शिक्षा कॉमर्स की परीक्षा पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। यह परीक्षा 27 सितंबर को अजमेर में 42 केंद्रों पर प्रस्तावित है।

संकट यह है :
अब आयोग के समक्ष संकट यह है कि परीक्षा के पेपर तैयार हो पाए हैं या नहीं, परीक्षा तिथि से पूर्व केंद्रों पर ये पेपर पहुंचेंगे या नहीं? कारण, आयोग की व्यवस्था के अनुसार पेपर प्रिंटिंग का कार्य अध्यक्ष स्तर पर होता है। सचिव व सदस्यों को भी पता नहीं होता।
गौराण ने पेपर तैयार करा लिए थे या नहीं, किसी को पता नहीं। पेपर को लेकर आयोग सचिव नरेश कुमार ठकराल ने भी अनभिज्ञता जाहिर की है।
आदेश का होता रहा इंतजार
आयोग में मंगलवार का दिन बिना अध्यक्ष के बीता। कामकाज पर व्यापक असर पड़ा। हबीब खान गौराण ने सोमवार रात ही अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। आयोग प्रबंधन की ओर से लगातार उनसे संपर्क साधने का प्रयास किया गया, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला।

कार्यवाहक के ही आदेश हो जाएं
आयोग में दिन भर यही इंतजार होता रहा कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी हो रही है तो आयोग में काम चलाने के लिए कार्यवाहक अध्यक्ष के ही आदेश जारी हो जाएं। रात में यह इंतजार पूरा हो गया। गौराण के इस्तीफा मंजूर होने संबंधी आदेश भी नहीं पहुंचे।
आईपीएस भी पसंद रहे हैं सरकारों को
आरपीएससी अध्यक्ष पद के लिए आईपीएस अधिकारी भी सरकारों की पसंद रहे हैं। हबीब खान गौराण समेत समय-समय पर पांच आईपीएस अफसर इस पद को सुशोभित कर चुके हैं।
आयोग के अध्यक्ष पद की कुर्सी एक बार फिर आईपीएस अधिकारी को सौंपने की चर्चा पूरे प्रदेश में जोरों पर है।
डीजीपी ओमेंद्र भारद्वाज का नाम सामने आ रहा है। आयोग की साख और प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए समय-समय पर सरकारों ने अपने पसंद के आईपीएस को भी इस पद पर जगह दी है। सीनियर आईपीएस पीएस यादव कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे।
इनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 1997 से 6 नवंबर 1997 तक रहा। इसके बाद आयोग में स्थाई अध्यक्ष पद पर आईपीएस देवेंद्र सिंह काे लगाया। सिंह डीजीपी रहे हैं। उनका कार्यकाल 6 नवंबर 1997 से 30 दिसंबर 2000 तक रहा। 4 जुलाई 2006 को एचएन मीणा को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया।
मीणा इस पद पर 19 सितंबर 2006 तक कार्यरत रहे। इसके बाद 28 फरवरी 2010 को आईपीएस एमएल कुमावत की स्थाई अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति की गई।
कुमावत 1 जुलाई 2011 तक इस पद पर रहे। कुमावत अपना चार्ज प्रो. बीएम शर्मा को सौंप कर गए। वे शिक्षाविद थे, लेकिन प्रो. शर्मा के कार्यकाल में हुई परीक्षाओं व परिणामों की विसंगतियों का खामियाजा आयोग अभी तक भुगत रहा है।
अायोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले हबीब खान गौराण भी आईपीएस अफसर रहे हैं। उनकी नियुक्ति 31 अगस्त 2012 को हुई और वे 22 सितंबर तक इस पद पर रहे।
कुछ सदस्यों के रूप में भी रहे

आयोग सूत्रों के मुताबिक आईपीएस अफसर ज्ञान प्रकाश पिलानिया, भवानी मल माथुर और सुभाष चंद्र चंदन भी अलग-अलग समय में आयोग में सदस्य रहे हैं।