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प्रधानमंत्री की चादर पेश

8 वर्ष पहले
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अजमेर। सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के 801वें उर्स के मौके पर मंगलवार को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की ओर से गरीब नवाज की मजार पर शान-ओ-शौकत के साथ चादर पेश कर मुल्क की खुशहाली व तरक्की के लिए दुआ की गई। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी नारायणसामी, केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री नमोनारायण मीणा और केंद्रीय कंपनी मामलात राज्यमंत्री सचिन पायलट पीएम डॉ. सिंह की चादर लेकर दिल्ली से यहां पहुंचे।
केंद्रीय मंत्रियों का काफिला सुबह करीब 8.30 बजे दरगाह पहुंचा।

इस काफिले में राज्यसभा सांसद अश्क अली टांक, राज्य सभा सांसद डॉ प्रभा ठाकुर, राज्य के चिकित्सा मंत्री एमादुद्दीन अहमद खां दुर्रु मियां, शिक्षा राज्यमंत्री नसीम अख्तर इंसाफ, नगर निगम के महापौर कमल बाकोलिया, नगर सुधार न्यास के अध्यक्ष नरेन शाहनी भगत, पूर्व विधायक डॉ श्री गोपाल बाहेती, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह रलावता, पूर्व विधायक हाजी कैयूम खान, कांग्रेस नेता हाजी इंसाफ अली, आरिफ हुसैन सहित कई नेता व कार्यकर्ता शामिल थे।

कांग्रेस के नेता दरगाह के निजाम गेट से ही चादर को जुलूस के रूप में लेकर रवाना हुए।बुलंद दरवाजा, शाहजहांनी मस्जिद दालान और जन्नती दरवाजे होते हुए चादर आस्ताना शरीफ ले जाई गई। मजार शरीफ पर प्रधानमंत्री की ओर से अकीदत का नजराना पेश किया गया। खादिम सैयद अब्दुल गनी गुर्देजी ने उन्हें जियारत कराई, सैयद यासिर गुर्देजी, सैयद जकरिया गुर्देजी और सैयद ईसा मियां चिश्ती ने दस्तारबंदी की और तबर्रुक भेंट किया।

अंजुमन व कमेटी ने किया इस्तकबाल
अंजुमन सैयदजादगान के सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगाराशाह की अगुवाई में अंजुमन पदाधिकारियों ने केंद्रीय मंत्रियों का इस्तकबाल किया, दस्तारबंदी की गई और तबर्रुक भेंट किया गया। दरगाह कमेटी ने बुलंद दरवाजे पर इस्तकबाल किया। कमेटी सदस्य असरार अहमद, अब्दुल वदूद और वहाज चौधरी ने केंद्रीय मंत्रियों की दस्तारबंदी कर व तबर्रुक देकर इस्तकबाल किया।

डॉ. सिंह को भेजी दस्तार
इधर खादिम सैयद गनी गुर्देजी ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और उनकी बेगम के लिए भी दरगाह की दस्तार और तबर्रुकात भेजे। उन्होंने केंद्रीय कंपनी मामलात मंत्री सचिन पायलट से प्रधानमंत्री डॉ सिंह को दरगाह लाने का आग्रह किया। डॉ सिंह अब तक दरगाह नहीं आए हैं।

महफिल खाना से पढ़ा संदेश
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा जायरीन के नाम भेजा संदेश महफिल खाना की सीढिय़ों से पढ़ कर सुनाया गया। डॉ. सिंह का संदेश अंग्रेजी, हिंदी व उर्दू भाषाओं में आया था। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री वी. नारायण सामी ने अंग्रेजी में, केंद्रीय कंपनी मामलात मंत्री सचिन पायलट ने हिंदी में और अंजुमन सचिव सैयद वाहिद हुसैन अंगाराशाह ने उर्दू में जायरीन के नाम संदेश पढ़ कर सुनाया।

यह है संदेश

डॉ. सिंह ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के उर्स के मौके पर, दुनिया भर में फैले तमाम अकीदतमन्दों को मुबारकबाद दी। नेक ख्वाहिशात पेश करते हुए मुसर्रत का इजहार किया। उन्होंने कहा कि आज, जब अजमेर दरगाह शरीफ में रुहानी तकरीबात जारी हैं, तब वक्त है कि जब हम महान और अजीम सूफी संत ख्वाजा साहिब की पाकीजा जिंदगी और उनकी तालीमात को याद करें, जो कभी पुरानी नहीं होतीं और तमाम मजाहिब के अहतराम का सबक देती हैं।

अलग-अलग मजहबों के दरमियान फर्क का लिहाज करने की ख्वाजा साहब की तालीम से भारत की उस मिली जुली तहजीब को मजबूती मिली जो दो हजार सालों से भी ज्यादा वक्त में बन कर उभरी है। ख्वाजा साहब की तालीमात का इतना ही अहम एक दूसरा पहलू समाज के नादार और गरीब तबकों, भूखे और बेयार-ओ-मददगार लोगों के साथ हमदर्दी रखने से वाबस्ता है।

इसी बुनियाद पर उन्हें गरीब नवाज के खिताब से याद किया जाता है। आज, जब लोग अजमेर शरीफ में रुहानी नजात पाने के लिए दुआ करने की गरज से जमा हो रहे हैं,यह याद करना भी जरूरी है कि आज की दुनिया में इन तालीमात की अमली अफादियत मौजूद है।

हम दूसरे लोगों की हर तरह से परवाह करके और जरूरतमंदों का ख्याल रख कर ही एक मुंसिफाना, इंसानी इकदार की हामिल और पुरसुकून दुनिया की तामीर कर सकते हैं। अगर हम ऐसा कर सकें, तो यकीनन हम ख्वाजा साहब की तालीमात पर सही मायनों में अमल करने का दावा कर सकते हैं। उन्होंने उर्स की तकरीबात की कामयाबी की तमन्ना की।