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स्टेट ग्रांट के तहत पट्टे जारी करने में अड़चन

9 वर्ष पहले
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अजमेर.नगर निगम प्रशासन राज्य सरकार के नियमों के कारण स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टे जारी करने में असमर्थ है। सरकार के निर्देश हैं कि नजूल भूमि पर पचास साल से ज्यादा समय से बसी बस्तियों के ही स्टेट ग्रांट के तहत पट्टे जारी किए जा सकते हैं, जबकि निगम क्षेत्र में ऐसे कई इलाके हैं जो राजस्व रिकार्ड में नजूल भूमि के तौर पर दर्ज नहीं है।
इस स्थिति में शिव नगर तोपदड़ा, सुखाड़िया नगर, शांति नगर, पहाड़गंज, खानपुरा इलाके में पट्टे के लिए करीब 700 आवेदकों को निराश होना पड़ सकता है। हालांकि नगर निगम प्रशासन ने इस बारे में राज्य सरकार से दिशा-निर्देश मांगे हैं, लेकिन जवाब नकारात्मक ही प्राप्त हुआ है। नगर निगम प्रशासन अब इन इलाकों की भूमि की किस्म आबादी में बदलने के लिए जिला प्रशासन से आग्रह करने पर विचार कर रहा है।
एक हजार से ज्यादा आवेदन
नगर निगम क्षेत्र के शिव नगर तोपदड़ा, सुखाड़िया नगर शांति नगर, पहाड़गंज, खानपुरा, रातीडांग, कांकरदा भूणाबाय, शीशाखान और अन्य इलाकों के करीब 1100 लोगों ने स्टेट ग्रांट एक्ट 1961 के तहत पट्टे के लिए आवेदन प्रशासन शहरों के संग अभियान में नगर निगम को दिए हैं।
पटवारी रिपोर्ट से आई बाधा
स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टे जारी करने में राज्य सरकार के निर्देश हैं कि नजूल भूमि पर बसे लोगों को ही पट्टे जारी किए जा सकते हैं। नगर निगम प्रशासन ने भूमि की किस्म और राजस्व रिकार्ड की जानकारी के लिए आवेदनों पर राजस्व विभाग के पटवारियों की रिपोर्ट मांगी थी।
हल्का पटवारियों की ओर से ज्यादातर आवेदन पत्रों में दी गई रिपोर्ट में भूमि कब्रिस्तान, चारागाह, पहाड़ी, वन क्षेत्र या अन्य किस्म का बताया गया है। इसमें शिव नगर तोपदड़ा, सुखाड़िया नगर के कई खसरे कब्रिस्तान में दर्शाए गए हैं, जबकि खानपुरा इलाके के आबादी क्षेत्रों को चारागाह भूमि माना गया है। पहाड़गंज इलाके में भी कई आवेदन पत्र इस तकनीकी खामियों के कारण अटक गए हैं।
भूमि की किस्म बदल सकते हैं कलेक्टर
पचास से ज्यादा सालों के आबादी क्षेत्रों के नियमन के लिए राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार कलेक्टर भूमि की किस्म बदल कर लोगों को राहत दे सकते हैं। इस बारे में नगर निगम मेयर कमल बाकोलिया ने बताया कि कलेक्टर को कई बार इस बारे में पत्र भेजकर और बैठकों में अवगत कराया जा चुका है।
स्टेटग्रांट के तहत पट्टे जारी करने के लिए राज्य सरकार के निर्देश के तहत नजूल भूमि पर बसे लोगों को ही पट्टे जारी किए जा सकते हैं। इस स्थिति में जिला प्रशासन पुराने आबादी इलाकों का मौका मुआयना करवाकर भूमि की किस्म परिवर्तित कर लोगों को राहत पहुंचा सकता है।
क्षेत्रवार शिविर लगाने का फैसला
मेयर कमल बाकोलिया के अनुसार स्टेट ग्रांट एक्ट और अन्य कच्ची बस्तियों में पट्टे के आवेदन पत्रों का निस्तारण मौके पर ही शिविर में किया जाएगा। इस बारे में बुधवार को निगम अधिकारियों की राउंड टेबल मीटिंग में गंभीरता से विचार विमर्श किया गया।
बैठक में अधिकारियों से कच्ची बस्तियों में पट्टे के लंबित प्रकरणों में कार्रवाई की जानकारी ली गई। समीक्षा में तय किया गया कि क्षेत्रवार शिविर लगाकर अधिकारी मौके पर ही आवेदन पत्रों का निस्तारण करेंगे। बैठक में मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रशासन शहरों के संग अभियान शिविर में प्राप्त प्रकरणों को त्वरित निस्तारण कर आमजन को राहत प्रदान करे, कोताही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में वार्डो में स्वीकृत विकास कार्य शुरू कराने को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। अधिकारियों को कहा गया कि ठेकेदारों को कार्यादेश जारी किए जाए, ताकि विकास कार्य शुरू होने से नागरिकों को सुविधा मिले। सफाई कर्मचारियों की भर्ती, निगम की राजस्व आय और वसूली, बीपीएल आवास योजना सहित अन्य कार्यो की समीक्षा की गई।
केईएम पर कब्जे के लिए कलेक्टर को भेजेंगे पत्र : निगम अधिकारियों की बैठक में मेयर कमल बाकोलिया ने स्थानीय निकाय विभाग से प्राप्त निर्देश के अनुसार निगम अधिकारियों को केईएम का कब्जा लेने के बारे में कार्रवाई करने को कहा। इस बारे में अधिकारियों ने सुझाव दिया कि केईएम समिति अध्यक्ष और कलेक्टर को पत्र भेजकर डीएलबी के निर्णय की पालना सुनिश्चित करने का आग्रह किया जाए।