जयपुर/अजमेर. तमिल फिल्मों के बाद अब हिंदी फिल्मों में भी मेयो गर्ल्स की पूर्व छात्रा दीक्षा सेठ दिखेंगी। दीक्षा की पारिवारिक पृष्ठभूमि का अभिनय से दूर-दूर तक का कोई वास्ता नहीं है। तमिल की पहली फिल्म भी दीक्षा को किस्मत से ही मिली। अभिनय में स्वाभाविकता ने उन्हें फिल्मों में एंट्री दिलवा दी। अजमेर से दीक्षा अपना गहरा जुड़ाव महसूस करती हैं क्योंकि यहां उन्होंने अपनी पढ़ाई की। ख्वाजा साहब की दरगाह में जियारत के बाद दीक्षा दैनिक भास्कर कार्यालय आईं और खुलकर बातचीत की। बाद में माय एफएम को भी इंटरव्यू दिया।
दीक्षा सेठ ने जियारत की
अभिनेत्री दीक्षा सेठ ने सोमवार को दरगाह जियारत की। उन्होंने गरीब नवाज की मजार पर मखमल की चादर और अकीदत के फूल पेश कर कामयाबी की मन्नत मांगी। सैयद मुकद्दस मोईनी ने उन्हें जियारत कराई, दस्तारबंदी की और तबर्रुक भेंट किया।
दैनिक भास्कर से खुलकर बातचीत की
अजमेर कैसे आना हुआ?
मेरी फिल्म रिलीज हुई, तब मेरे पापा बहुत बीमार थे। अब वे ठीक हैं। गरीब नवाज का शुक्रिया अदा करने आई थी। वैसे मैं जब भी अजमेर आती हूं, गरीब नवाज की दरगाह जरूर जाती हूं।
अजमेर से क्या रिश्ता है?
मैंने यहीं 2008 में मेयो गर्ल्स से एजुकेशन ली है। मेरी कई सहेलियां हैं। डॉ. अनूप की बेटी मेरी सबसे बेस्ट फ्रेंड हैं। इसीलिए मेरा उनसे पारिवारिक रिश्ता है। मैं उन्हीं के यहां आती जाती भी हूं। अजमेर को मैं बहुत मिस करती हूं।
फिल्मों में कैसे पदार्पण हुआ?
मेरी फैमिली बैकग्राउंड सेना की रही है। मेरे पिता आईटीसी में थे। अभिनय से हमारा कोई वास्ता नहीं था। न मैंने किसी स्कूल में अभिनय की विधिवत शिक्षा ली। मैं जब
हैदराबाद में थी, तब वहां तमिल फिल्म बेदम बनने जा रही थी। मुझे तो बाय लक ऑफर मिला। फिल्म बनाने वालों को भी पता था कि मुझे अभिनय की विधिवत शिक्षा नहीं मिली है, लेकिन मुझे जो काम दिया वो बहुत ही सहजता से होता चला गया। मेरा उस फिल्म में 15-20 मिनट का ही रोल था। फिल्म को नेशनल अवार्ड मिला।
लक्ष्य क्या है, इतना आगे जाएंगी कि कैटरीना पीछे छूट जाए?
कैटरीना बहुत टैलेंटेड हैं। मैं उनसे कम्पेरिजन नहीं कर सकती। बस काम करना है। श्रेष्ठ देने का प्रयास करूंगी। माधुरी मेरी आदर्श हीरोइन हैं और
ऋतिक मेरे पसंदीदा हीरो।
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