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ढाई साल पहले तबादला, आदेश नहीं लेने पर शिक्षिका डाक से रिलीव

9 वर्ष पहले
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अजमेर.राज्य सरकार द्वारा ढ़ाई वर्ष पहले किए गए तबादले के आदेश पर अब कहीं जाकर अमल हो पाया है। कार्यमुक्ति के आदेश नहीं लेने पर राबाउप्रावि चंदन निवास की शिक्षिका मंजू पाराशर को अब डाक के जरिए भिनाय ब्लाक की राउप्रावि रूपपुरा के लिए रिलीव किया गया है।
राज्य सरकार ने एक आदेश जारी कर अजमेर शहर में अधिकतम ठहराव को देखते हुए 7 जून 2010 को अजमेर से बाहर ग्रामीण क्षेत्र की राउप्रावि रूपपुरा में तबादला कर दिया। लेकिन आदेश के बावजूद शिक्षिका को स्कूल से रिलीव नही किया गया। सरकार ने सख्ती बरती तो मंजू पाराशर ने परिवेदना दे दी।
परिवेदना का निस्तारण नहीं किए जाने की आड़ में शिक्षिका ढ़ाई साल तक अजमेर स्कूल में ही जमी रही। लेकिन जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी रामचंद्र सावंत ने शिक्षिका पाराशर का अजमेर शहर में अधिकतम ठहराव 250 माह होने के कारण किए गए समायोजन को सही माना और स्कूल की प्रधानाध्यापिका को इन्हें रिलीव करने के निर्देश दिए।
आदेश की पालना में स्कूल की प्रधानाध्यापिका मधु गर्ग ने पाराशर की कार्यमुक्ति के आदेश दिए तो उसने लेने से इंकार कर दिया। इस पर पोस्ट आफिस के जरिए कार्यमुक्ति आदेश भिजवा दिए।
'जिला प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी के आदेश की पालना में शिक्षिका मंजू पाराशर को कार्यमुक्त किया था लेकिन उन्होंने आदेश लेने से इंकार कर दिया। इस पर उन्हें डाक के जरिए कार्यमुक्त कर दिया गया है।'
मधु गर्ग, प्रधानाध्यापिका
'समायोजन के तहत शिक्षिका मंजू पाराशर का तबादला राबाउप्रावि चंदन निवास अजमेर से राउप्रावि रूपपुरा, भिनाय किया गया था। परिवेदना के कारण उन्हें 7 जुलाई 2010 को रिलीव करने पर रोक लगाई थी। लेकिन अधिकतम ठहराव होने के कारण समायोजन सही पाए जाने पर अब परिवेदना निरस्त कर शिक्षिका को तुरंत रिलीव करने के निर्देश दे दिए गए है।'
रामचंद्र सावंत, डीईओ प्रारंभिक