रंग लाया चार-पांच सालों का अभ्यास
मनीष कुमार पिछले चार-पांच साल से नगरा स्थित भट्टा पर कलाकारों को रावण का पुतला बनाते हुए देखा करता था। घंटों उनके पास बैठता रहा। रावण का पुतला बनाने वाले कलाकार भी कई बार रुखा बर्ताव करते हुए उसे चले जाने को कह दिया करते थे।
मनीष मना करने के बाद भी वहीं पर बैठा रहता और देखकर ये कला हाथों से आजमाने का ख्वाब देखता। बाद में मनीष घर पर आकर रावण का पुतला बनाने का अभ्यास करता रहा। तीन साल पहले उसने 10 फीट ऊंचा रावण तैयार किया। शुरुआत में पुतला लुढ़कने-बिगड़ने जैसी परेशानी आड़े आई, जो अभ्यास करते-करते सुलझती गई।
देर रात तक करते रहे काम
मनीष ने बताया कि वह दिन में फैक्ट्री में काम करने जाता और शाम को खाना खाने के बाद घंटों पुतला बनाने में जुटा रहता। उसके इस काम में पड़ोस के राहुल, गिर्राज, बॉबी, विकास, आदित्य और पिंकू मदद करते। ये बच्चे स्कूल से आने के बाद उसके साथ ही काम में मदद करने के लिए जुट जाते। हर रोज सांझ ढलते ही पुतला बनाने के जतन में जुटने वाले बच्चे देर रात जागकर मेहनत करते रहते।
यूं ऊंचा होता गया पुतला
मनीष ने बताया कि गत वर्ष उसने 25 फीट ऊंचा रावण बनाया था। इस बार 35 फीट ऊंचे बनाने का लक्ष्य तय किया था। उनके पास पैसे नहीं थे। आसपास रहने वाले लोगों ने धीरे-धीरे आर्थिक मदद की। पुराने बांस, पुराने अखबार और पुराने रंगीन पेपर सस्ते में खरीदकर लाते और रावण का पुतला तैयार करते। रात को काम करते समय स्थानीय लोग भी उनकी मदद के लिए आगे आ जाते थे।
पलकें झपकाएगा रावण
मनीष ने बताया कि रावण दहन से पहले रावण का पुतला पलकें झपकेगा और हंसेगा भी, इसके लिए उन्होंने पुतले की आंखों पर रस्सी बांधी है। रस्सी को पकड़ कर एक व्यक्ति खींचेगा, जिससे वह पलकें झपकेगा और हंसेगा।
नन्हें कलाकारों को ऐसा करने में काफी मेहनत करनी पड़ी। कई बार असफल होने के बाद हौसला नहीं टूटा और कामयाबी मिली। 35 फीट ऊंचा रावण बनाने के बाद मनीष आैर उसके साथियों का हौसला बढ़ गया है।
उनकी इच्छा है कि वे पटेल मैदान में आयोजित होने वाले दशहरा समारोह के लिए रावण, मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला बनाएं।
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