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कार्डियोथोरेसिक यूनिट : लोकार्पण 2 दिन बाद, इलाज के लिए 25 दिन का इंतजार

7 वर्ष पहले
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अजमेर। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे 15 दिसंबर को भले ही कार्डियोलॉजी विभाग में कार्डियोथोरेसिक यूनिट का लाेकार्पण कर देंगी, मगर मरीजों को यहां उपचार कराने के लिए अभी करीब 20-25 दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा। अभी तक यूनिट के वार्डों एवं आईसीयू में पलंगों की ही व्यवस्था हो रही है, जबकि रंगरोगन किया जा रहा है। नए भवन में निर्माण व तकनीकी पहलुओं से जुड़े बाकी छोटे-बड़े कार्य पूरे करने की कवायद चल रही है।

यूनिट के लिए जेएलएन मेडिकल कॉलेज से नर्सिंग स्टाफ की मांग की गई है। ऐसे हालात में किसी भी तरह मुमकिन नहीं कि यहां दो-तीन दिनों के बाद लोकार्पण के मौके पर मरीजों को उपचार व ऑपरेशन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध हो जाएं। हालांकि राज्य सरकार के एक वर्ष की उपलब्धियों की फेहरिश्त लंबी करने के मद्‌देनजर चिकित्सा विभाग के नुमाइंदे उक्त यूनिट को लोकार्पण लायक स्थिति में लाने के लिए जी तोड़ जतन कर व्यवस्थाएं जुटा रहे हैं। यूनिट संचालन के लिए 36 नर्सिंग स्टाफ की जरूरत है। इसके लिए कॉलेज प्रशासन से स्टाफ की मांग की गई है। जेएलएन मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. अशोक चौधरी ने बताया कि एक मरीज के बाईपास ऑपरेशन पर 75 हजार रुपए का खर्च आएगा। पीपीपी मोड के तहत कार्डियक सर्जन को प्रति केस 32 से 35 हजार रुपए मानदेय मिलेगा।

15 दिन पहले सीएम ने अजमेर में दिए थे निर्देश

अस्पताल में करीब 2.5 करोड़ रुपए की लागत से कार्डियोथोरेसिक यूनिट बनी थी। दो साल पहले कार्डियोथोरेसिक सर्जन डॉ. रामगोपाल का जयपुर तबादला होने के कारण यह चालू नहीं हो सकी। तब से यूनिट पर ताले जड़े हुए हैं। गत 30 नवंबर को अजमेर यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कार्डियोथोरेसिक यूनिट को पीपीपी मोड पर चलाने के निर्देश दे दिए थे। इसके बाद से ही जिला और अस्पताल प्रशासन उक्त यूनिट शुरू करने में जुट गया।
दो साल पहले ही शुरू हो सकती थी यूनिट
जेएलएन अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक यूनिट दो साल पहले ही बनकर तैयार हो चुकी थी। वर्ष 2009 में ही यहां के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद कर ली गई थी। तभी 10-10 पलंग के दो नए वार्ड बनकर तैयार हो गए थे। साथ ही 6 पलंग का आईसीयू वार्ड बन चुका था। वर्ष 2012 तक उक्त यूनिट पूरी तरह बनकर तैयार हो गया था। यूनिट शुरू नहीं होने के कारण तत्कालीन कार्डियक सर्जन अपना स्थानांतरण करवाकर जयपुर चले गए। पीपीपी मोड पर संचालित करने का निर्णय दो साल पहले ही ले लिया जाता तो उक्त यूनिट चालू की जा सकती थी।
इसलिए हो रही देरी
किसी भी यूनिट के ऑपरेशन थियेटर को शुरू करने से पहले उसका फ्यूमिगेशन किया जाता है। इसके बाद कल्चर लेते हैं। इसकी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही ओटी में ऑपरेशन संभव हो पाता है। नए ऑपरेशन थियेटर को शुरू करने से पहले तीन से चार बार कल्चर रिपोर्ट ली जाती है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में 20 से 25 दिन लग सकते हैं।
कार्डियोथोरेसिक यूनिट के लिए लगभग 36 नर्सिंग कर्मियों (प्रथम श्रेणी-द्वितीय श्रेणी) की आवश्यकता है, फिलहाल स्टाफ नहीं है। जेएलएन मेडिकल कॉलेज से डिमांड की गई है। इस प्रक्रिया को पूरा होने में समय लग सकता है।
पीपीपी मोड पर यूनिट की जिम्मेदारी जयपुर के डॉ. सेपावाला को सौंपी गई है। बाहर से आने वाले कार्डिक सर्जन को अपनी व्यवस्था बनाने में भी समय लगेगा। लोकार्पण के बाद ही उन्हें यूनिट संभलाई जाएगी।
आगे की स्लाइड में पढ़िए जेएलएन मेडिकल काॅलेज प्राचार्य से सवाल-जवाब...