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जलदाय महकमे में 35 हजार पद मृत

9 वर्ष पहले
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अजमेर.प्रदेश में जलदाय विभाग के नियमित संवर्ग के करीब 35 हजार पद मृत है। इन पदों पर काम करने वाले हेल्परों और बेलदारों को पदोन्नति नहीं मिलती। कर्मचारियों के रिटायर होने या मर जाने के बाद यह पद ही खत्म कर दिए जाते हैं। बरसों से जलदाय महकमे को सेवाएं दे रहे कर्मचारी बिना किसी प्रमोशन के रिटायर हो रहे हैं।
आठ साल पहले 1 अप्रैल 1994 और चार साल बाद 1 जनवरी 1998 को सरकार ने आदेश जारी जलदाय महकमे में नियमित संवर्ग में काम कर रहे करीब 35 हजार हेल्पर, बेलदार तथा तकनीकी कर्मचारियों को नियमित किया था।
साथ ही यह तय किया गया था कि ऐसे कर्मचारियों के लिए अलग से सेवा नियम बनाए जाएं। 1 नवंबर 1998 में इन पदों का सरकार की ओर से मृत घोषित कर दिया गया।
मौजूदा समय में इन कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों को मिलने वाली तमाम सुविधाएं और पगार मिल रही है, मगर इन्हें पदोन्नति नहीं दी जा रही। जब से यह पद मृत घोषित किए गए है, तब से अब तक करीब साढ़े तीन हजार नियमित संवर्ग कर्मचारी बगैर पदोन्नतियों के रिटायर हो चुके हैं। इससे इनकी पेंशन पर भी फर्क पड़ता है।
मामला अब कार्मिक विभाग में
जानकारी के मुताबिक कर्मचारी संगठनों के मांग किए जाने के बाद जलदाय महकमे के चीफ इंजीनियर प्रशासन रामजस मीणा ने इस संबंध में गत दिनों डिप्टी सेक्रेट्री को पत्र दिया था। डिप्टी सेक्रेट्री ने इस मामले को कार्मिक विभाग को भेज दिया है। इस मामले में अब जलदाय महकमे के पास कार्मिक विभाग के पास जवाब आना बाकी है।
इनका कहना है
'नियमित संवर्ग कर्मचारियों के पद मृत हैं। इन कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिलता। इस मामले में हमारी ओर से फैसला नहीं लिया जा सकता। इस संबंध में डिप्टी सेक्रेट्री को पत्र लिखा गया है।'
-रामजस मीणा, चीफ इंजीनियर प्रशासन, जलदाय विभाग
'कर्मचारियों के हक के लिए तीन सालों से लड़ाई लड़ी जा रही है। विभाग के अफसरों की मंशा सही होती तो आम कर्मचारी और नियमित संवर्ग वाले कर्मचारियों में भेदभाव जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। चीफ इंजीनियर प्रशासन से यह मामला अब कार्मिक विभाग के पास पहुंच गया है। सरकार से मांग है कि वह कर्मचारियों के मृत पदों के आदेश को निरस्त करे।'
-मूल सिंह पंवार, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान जलदाय कर्मचारी महासंघ