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मदरसा पैराटीचर्स को 17 माह से नहीं मिला मानदेय

7 वर्ष पहले
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राज्यसरकार द्वारा मदरसों में काम कर रहे पैराटीचर्स को 5700 रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। सरकार द्वारा पिछले 17 महीने से मानदेय नहीं दिए जाने के बाद एक पैराटीचर्स के करीब 1 लाख और जिले के 25 पैराटीचर्स के करीब 25 लाख रुपए बकाया हो गए हैं।

भास्कर न्यूज. अलवर

जिले के मदरसों में काम कर रहे 25 पैराटीचर्स पिछले 17 महीने से मानदेय को तरस गए हैं। वे रोजाना अधिकारियों से मानदेय की गुहार लगा रहे हैं। दरअसल सर्व शिक्षा अभियान पूर्व में मदरसों में काम रहे पैराटीचर्स से जुड़ा हुआ था। एक अप्रेल 2013 से इन पैराटीचर्स को एसएसए से मदरसा बोर्ड के अधीन कर दिया। उसके बाद से पैराटीचर्स का वेतन खटाई में पड़ गया है।

पैराटीचर संजय कुमार ने बताया कि मानदेय के संबंध में मुख्य सचिव राजीव महर्षि, मदरसा बोर्ड के सचिव राजनारायण शर्मा, प्रमुख वित्त सचिव सुभाष गर्ग, अल्पसंख्यक विभाग के निदेशक अशफाक हुसैन, कुरैशी एसएसए आयुक्त सहित तमाम अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक मानदेय नहीं मिल पाया है। 17 महीने का मानदेय कौनसा विभाग देगा, यह भी तय नहीं है। अभी अल्पसंख्यक विभाग और एसएसए दोनों एक-दूसरे पर टाल रहे हैं। जिला अल्पसंख्यक अधिकारी डॉ. मुंशी खान का कहना है कि पैराटीचर्स को हमारे विभाग ने दो महीने पूर्व ही मदरसा बोर्ड में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं और हमने यह काम पूरा कर लिया है। हमने इनके दो महीने के मानदेय के लिए भी सरकार को सूची भेज दी है। जल्दी ही मानदेय जारी कर दिया जाएगा। शेष|16पर











इनकाकहना है कि दो महीने से पहले का मामला सरकार के स्तर का है इसलिए गाइडलाइन वहीं से जारी होगी। तब जाकर शेष भुगतान हो पाएगा। इधर एसएसए एडीपीसी राजकुमार जैन का कहना है कि विभाग से 31 मार्च को मदरसों को अल्पसंख्यक विभाग के अधीन कर दिया था। उसी समय सभी रिकॉर्ड फाइलें भी दे दी थी। मानदेय के मामले का निपटारा वहीं से होगा।