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सरपंचों को आदेश दो घंटे रोजाना दफ्तर में बैठो

7 वर्ष पहले
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सरपंचोंको सरकार ने आदेश जारी कर ग्राम पंचायत कार्यालयों में बैठने के लिए पाबंद कर दिया है। सभी सरपंचों को कहा गया है कि वे भी रोजाना सुबह दस से दोपहर 12 बजे तक पंचायत कार्यालयों में बैठेंगे। हाल ही ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग शासन सचिव राजेश यादव ने इस संबंध में आदेश जारी कर लोगों की सुविधा के लिए सरपंचों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया है।

प्रशासनिकमुखिया बनाया तो ऑफिस में भी बैठो

शासनसचिव की ओर से जारी आदेश में साफतौर पर कहा गया है कि सरकार ने सरपंचों को पंचायत का प्रशासनिक मुखिया बनाया है। ग्राम पंचायत के अधीन पांच विभाग आते हैं इसलिए दायित्वों में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। अधिकांश कार्य ऐसे हैं जिनमें सरपंचों की पूर्व स्वीकृति जरूरी है। जनता परेशान हो साथ ही समय पर काम निपटे, इसलिए सरपंचों का कर्मचारियों के साथ कार्यालय में बैठना जरूरी है। सरकारी कर्मचारियों को भी नियमित रूप से कार्यालय में मौजूद रहने तथा इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी का दायित्व सरपंचों को सौंपा गया है।

सरपंचोंको अब गैरहाजिरी की देनी होगी सूचना

सरपंचोंके लिए तय किए गए कार्यालय समय पर यदि कोई सरपंच किसी दिन गैर-हाजिर रहता है तो उसे इसकी सूचना ग्राम पंचायत भवन के सूचना पट्ट पर अंकित करनी होगी। उसमें उसे बताना होगा कि वह आगे कब पंचायत कार्यालय पर मौजूद रहेगा।

बाध्यताके साथ शक्तियों में इजाफा

ग्रामीणविकास एवं पंचायती राज विभाग ने एक ओर सरपंचों की ऑफिस में मौजूदगी की अनिवार्यता की है तो दूसरी ओर उनकी वित्तीय शक्तियों में इजाफा भी किया है। जानकारी के अनुसार विभाग ने सरपंच से लेकर एसई तक की फायनेंशियल पॉवर्स बढ़ा दी है। एमएलए, एमपी लेड, मनरेगा आदि को छोड़कर शेष कामों के लिए सरपंच अब एक के बजाय ढाई लाख तक के कामों की स्वीकृति जारी कर सकते हैं। इसके अलावा जेटीए ढाई से बढ़ाकर पांच लाख, सहायक अभियंता 15 लाख तक, एक्सईएन की पावर्स में दोगुना बढ़ोतरी कर 25 से 50 लाख तथा एसई की पॉवर्स को 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ कर दिया गया है।