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कॉपर माइनिंग के सपने को वन विभाग का झटका

7 वर्ष पहले
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भारतीय सर्वेक्षण विभाग के सर्वे की पहली रिपोर्ट आने के बाद से ही थानागाजी के मूंडियावास क्षेत्र में कॉपर के भंडार पर नजरें जमाए बैठी देश की नामी कंपनियों के लिए यह बड़ा झटका है। हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड सहित अन्य कंपनियों को माइनिंग की छूट देने संबंधी फाइल पर फिलहाल फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने सहमति नहीं दी है।

सरिस्का क्षेत्र से सटे इस इलाके में कॉपर माइनिंग के लिए लीज देने के मामले में वन विभाग ने असहमति जताते हुए सरकार के स्तर पर विमर्श के लिए फाइल रोक ली है। करीब चार वर्ष पूर्व मूंडियावास क्षेत्र में जीएसआई के शुरू हुए सर्वे के बाद पिछले वर्ष मिले कॉपर के अकूत भंडार के बाद इस इलाके की कायापलट होने की संभावनाएं जताई जा रही थी। प्रारंभिक चरण में सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि इलाके में कम गहराई पर ही कॉपर की उपलब्धता है। करीब आधा दर्जन बोरवैल में गहरी खुदाई के बाद विभाग ने प्रारंभिक चरण में ही 25 से 30 मिलियन टन कॉपर होने संबंधी रिपोर्ट पीएमओ और माइनिंग मिनिस्ट्री को भेज दी थी। इसके बाद लगातार चल रहे सर्वे में इस इलाके में कॉपर की प्रचुरता का अनुमान लगाया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक इस क्षेत्र में करीब 50 मिलियन टन कॉपर होने की संभावना जताई जा रही हैं।

^हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड सहित अन्य कंपनियों ने पिछले वर्ष लीज फाइल लगाई थी, जिन पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की सहमति नहीं मिली है। पीएसमीना, खनिजअभियंता.

24 अगस्त 2013 को प्रकाशित खबर।