तीन दिन तक रही भूखी-प्यासी
आसमानमें हेलिकाप्टर बहुत आए लेकिन फोटो खिंचने के सिवाय कुछ नहीं कर रहे थे। तीन दिन तक तीन मंजिला भवन की टीन शेड पर आसमान से बारिश की बौछार सर्द हवाओं ने चिंता बढ़ा दी। इन हालातों में भूख-प्यास से बेहाल दीप्ति अग्रवाल श्रीनगर से शनिवार को बहरोड़ गई। कस्बे के दीवान मोहल्ला निवासी दीप्ति पुत्री ब्रजेश कुमार श्रीनगर की बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की चर्चा करते हुए रोने लगी। उन्होंने बताया कि पिता की एक साल पहले आकस्मिक मृत्यु होने के बाद पापा के श्रीनगर के इंद्रा नगर स्थित आर्मी कैंट बादामी बाग में आर्मी कैंटीन कारोबार को संभाल रही थी।
कारोबार के लिए प्रतिमाह श्रीनगर जाकर कार्य की देखभाल करती थी। 26 अगस्त को श्रीनगर अकेली गई थी। वहां लगातार बारिश होने से बाढ़ के हालत बनते गए। जिसमें पानी 30 से 35 फीट तक ऊंचाई को छूने से तीन मंजिला भवन पानी में डूब गए। जिससे पानी के बहाव से बचाव के लिए उनके भवन की आखरी टीन शेड पर पहुंचकर मदद के लिए चीखती रही। लेकिन किसी ने तीन दिन तक कोई रेस्क्यू नहीं किया। लोग अपने आपको बचाने के प्रयास में लगे रहे। आसमान में कैमरे लगे हेलिकाप्टर आते तो उन्हें देखकर बचाव करने की आस लगती लेकिन हेलिकाप्टरों से फोटो खींचकर घूमते हुए निकल जाते। लेकिन उनके द्वारा किसी प्रकार की कोई व्यवस्था तक नहीं की गई। पानी भूख के लिए किसी प्रकार की मदद नहीं मिली। पानी के बहाव में मृत लोगों के शव बह रहे थे। उस पानी को पीकर प्यास मिटाती रही। दीप्ति चार दिन बाद स्थानीय लोगों द्वारा छोटे से लकड़ी के डिब्बे के सहारे शिवपुरा एरिया में पहुंची। जहां से हेलिकाप्टर की मदद से गुप्तकार रोड राजभवन पहुंची, जहां से वह दिल्ली आई।
बहरोड़. दीप्तिअग्रवाल उसके परिवार सदस्य।
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