- Hindi News
- ईश्वर की कृपा के बिना उद्धार नहीं : जया किशोरी
ईश्वर की कृपा के बिना उद्धार नहीं : जया किशोरी
जयकारोंकी गूंज के बीच सोमवार को मंगल परिणय मैरिज होम में तीन दिवसीय नानी बाई रो मायरो कथा शुरू हुई। अग्रसेन जयंती समारोह के तहत अग्रवाल महासभा एवं नारायण सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान कथा वाचक जया किशोरी ने धर्म के मायने समझाए। उन्होंने कहा कि बुढ़ापे में इंसान में भजन की इच्छा होनी चाहिए। ईश्वर की कृपा के बिना उद्धार संभव नहीं है। कथा के पहले दिन उन्होंने भक्त नरसी मेहता के जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि भक्त नरसी मेहता का जन्म जूनागढ़ के नागर ब्राह्मण परिवार में हुआ था। नरसी मेहता जन्म से गूंगा और बहरा था। बाल्य अवस्था में उनके माता- पिता की महामारी में मृत्यु हो गई थी। वे अपनी दादी के साथ रहते थे। दादी जहां जाती, वे भी वहां जाते थे। एक उनकी दादी जब शिव मंदिर में पूजा करने गई तो मंदिर के एक कोने में साधु बैठा देखा। नरसी की दादी को देख साधु ने आंख बंद कर लीं। साधु को देख नरसी की दादी महाराज- महाराज कहने लगी। साधु ने सोचा कि बुढ़िया यहां से जाने वाली नहीं है तो उन्होंने आंख खोली और कहा क्या महाराज- महाराज लगा रखा है। तुम्हारे कारण मैं मंत्र और भूल जाऊंगा। बताओ क्या बात है। दादी बोली बोली-महाराज में इस बालक के कारण परेशान हूं। साधु ने नरसी के सिर पर हाथ फेरा और कहा कि यह तो भगवान का बड़ा भक्त है। नरसी की दादी ने कहा -महाराज यह बालक तो सुनता है और ही बोलता है। साधु ने नरसी के कान में कहा -बोल बेटा जय श्री राधे कृष्ण। नरसी के मुख से जय श्री राधे- कृष्ण सुनकर दादी खुश हो गई। वह समझ गई मंदिर में कोई सामान्य साधु नहीं है। नरसी को अचानक बोलता देख उसकी भाभी प्रसन्न नहीं हुई। कुछ दिनों बाद नरसी की दादी की मृत्यु के बाद आए दिन नरसी और उसकी भाभी के बीच विवाद होना सामान्य बात हो गई। एक दिन जब नरसी लकड़ी लेने जंगल जा रहा था तो रास्ते में सत्संग होता देख रुक गया। घर देरी से पहुंचने पर नरसी का भाभी से विवाद हुआ। नरसी ने घर छोड़ दिया। जंगल में शिव मंदिर दिखाई दिया। यहां नरसी ने भगवान भोले की आराधना शुरू कर दी। नरसी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उसे दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। नरसी ने दो बार वरदान मांगने को कहा। दोनों बार उन्होंने वरदान में भगवान राधा- कृष्ण मांगे। शिव ने कहा कि इसके लिए गोपी बनना पड़ेगा। क्यों कि मुझे