अलवर. सरकारी जमीन पर ढाई फुट का अतिक्रमण करने के लिए शिवाजी पार्क कॉलोनी में 250 घरों में लोगों ने परिवार की जान जोखिम में डाल रखी है। बिजली के खंभों को मकान का हिस्सा बनाने से हादसा किसी भी दिन हो सकता है। सरकारी जमीन पर कब्जा लोगों को भारी पड़ सकता है। इस बात को जानते हुए भी अतिक्रमण करने के लिए जोखिम उठाया है।
गरीबों को घर देने के लिए 1982 में यूआईटी की ओर से शिवाजी पार्क काॅलोनी बनाई गई थी। सेक्टरों में बांट कर घर बनाए गए थे। 2700 घरों वाली काॅलोनी में एक समय था जब घर से खंभे अलग थे। 32 साल बाद गरीबों की यह काॅलोनी बदल गई है। यहां दो-तीन मंजिला मकान नजर आते हैं।
एक समय था जब छत के पास से निकलते तारों को दूर करने के लिए कालोनी के लोगों ने सामूहिक रूप से मांग उठाई। इसके बाद खंभों पर डी के आकार के एंगिल लगा कर दूर किया था। उसी कालोनी में आज लोगों ने खंभों और तारों को घर की दीवारों और बालकॉनी तक में समेट लिया है। लाभ इतना सा है कि कुछ फुट जमीन पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया। खतरा पूरे परिवार पर करंट आने का है।
अतिक्रमण से सात फुट की रह गई गलियां
इस कालोनी में मकानों के प्लॉट का साइज 14 फुट चौड़ाई 28 फुट लंबाई का है। कुल 392 वर्ग फुट के मकान यूआईटी ने आवंटित किया। इसमें मात्र 35 वर्ग फुट का अतिक्रमण है। इसके लिए परिवार की जान जोखिम में डाली है। इस अतिक्रमण के कारण कालोनी के सेक्टरों की सड़कें 12 फुट से घट कर सात फुट की रह गई हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
किसी ने शिकायत नहीं की। लोगों ने बिजली के खंभों तक अतिक्रमण कर लिया है तो गलत है। इस मामले में जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी। कालोनी के लोगों को समझना चाहिए कि वे अपना अहित कर रहे हैं। इसे देखते हुए ऐसा नहीं कराना चाहिए। महेंद्रलोढ़ा, सचिव,यूआईटी।
क्या कहते हैं लोग
1.शिवाजी पार्क निवासी सुरेश तिवाड़ी का कहना है कि बिजली के खंभे मकान की दीवारों से सट गए हैं। छज्जे में से होकर निकल रहे हैं। हादसों को निमंत्रण है। लोगों को समझाया पर कोई भी मानने को तैयार नहीं। एक के बाद अब सैकड़ों मकानों के दायरे में बिजली के खंभों को मकान के दायरे में समेट लिया है।
2. कालोनी के अनिल अरोड़ा का कहना है बिजली के करंट से बचने के लिए लोग तारों से दूरी रखकर घर बनाते हैं। जिस तरह शिवाजी पार्क मे खंभे घरों से चिपके दिखाई देते हैं। उससे लगता है कि किसी दिन बड़ा हादसा होगा। प्रशासन गलत होता तो शिकायतों का पुलिंदा लगा होता। यहां तो लोग खुद जान जोखिम में डाल रहे हैं।
कालोनी में छह सेक्टर है। सेक्टरों को अलग करने वाली मुख्य सड़कों का हाल ठीक है। सेक्टरों के भीतर की गलियों का हाल देखकर सामान्य आमजन विचलित हो सकता है। 12 फुट की सड़क मकानों के बीच छोड़ी गई थी। इस पर दोनों ओर ढाई-ढाई फुट के चबूतरे बना लिए गए हैं। यह तक की चबूतरे बिजली के खंभों से भी आगे निकल आए हैं।
मकान पर दूसरी मंजिल बनाई गई हैं। उस में बिजली के खंभे मकान की दीवारों को छूते हुए निकल रहे है। बिजली के तारों को बालकॉनी से आराम से छुआ जा सकता है। कुछ सेक्टरों में तो मकानों के आगे बिजली के खंभे दीवारों से चिपक रहे है और खंभों के आगे बाउंड्री कर ली गई है।
छतसरियों से बनी
यूआईटी ने मकानों का निर्माण किया था, इनका अब नक्शा ही बदल गया है। कई मकानों सरिए और कंकरीट की छत डल गई है। इन मकानों में छज्जे निकाल कर बनाई गई बालकॉनी में से ही बिजली के खंभे ऊपर निकलते हैं।