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सवालों में डायरी और डाॅक्टर

7 वर्ष पहले
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अलवर . राजस्थान पेंशनर मेडिकल फंड (आरपीएमएफ) से दी जाने वाली पेंशनर की दवा की डायरियों में 60 लाख रुपए का घपला सामने आया है। पिछले साल मार्च का 48 लाख का भुगतान उठा, जबकि इस साल मार्च में राशि उठाने का आंकड़ा एक करोड़ काे पार कर गया।
आंकड़ों ने चौंकाया तो ट्रेजरी कार्यालय ने रेंडम तरीके से करीब 500 डायरियों की जांच की। इसमें अनियमितता सामने आने के बाद विभाग ने होलसेल भंडार के इन बिलों के भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। डायरियों की जांच के लिए विशेष जांच समिति गठित करने की अनुशंसा के साथ फाइल कलेक्टर को भिजवाई गई है।
फरवरी महीने में 9 केस ऐसे मिले जिनमें डाॅक्टर द्वारा लिख गई दवाओं से दुगनी दवा दी गई। मार्च में 36 केस ऐसे मिले जिनमें डाॅक्टर की ओर दवा नहीं लिखे जाने के बावजूद दवाएं दी गई, और जो दवा डाॅक्टर ने लिखी है उससे दुगनी और तीन गुना तक दवाई दी गई।

सहकारी मेडिकल दुकान नं.1

31 प्रकरणों में दुगने से अधिक मात्रा में दवा दी गई। 7 दिन के बजाए 1 महीने की दवाएं दी गई। मार्च में 71 केसों में कांट-छांट कर दवा की मात्रा बढ़ाई गई और जो दवा पर्ची में नहीं लिखी थी वो भी दी गई। 5 दिन के एवज में एक महीने की दवा दी गई।

सहकारी मेडिकल दुकान न. 2

23 प्रकरणों में लिखी गई दवा की मात्रा से दुगनी दवा दी गई। पर्ची में कांट छांट और बिना लिखी दवाइयां भी दी गई। मार्च में डाॅक्टर के बजाए किसी अन्य व्यक्ति से दवाएं लिखवाकर दी गई। 10 दिन के बजाए 60 दिन की दवा दी गई।

सहकारी मेडिकल दुकान नं.3

33 केस जिनमें डाॅक्टर ने दवा की मात्रा और दिन ही नहीं लिखा, इसके बावजूद एक महीने की दवा लिख दी। मार्च में 34 केसों में कटिंग कर मात्रा बढ़ाई गई और किसी और व्यक्ति के लिखे जाने पर दवा दी गई। 30 के बजाए 60 टेबलेट दी गई।

सहकारी मेडिकल दुकान नं. 4

5 केसों में लिखी गई मात्रा से अधिक दवा दी गई। मार्च में 31 केसों में बिलों में दवा की मात्रा बढ़ाई गई।

सहकारी मेडिकल दुकान नं. 5

बिनाडाॅक्टर के साइन के दवा दी गई। 125 टेबलेट के स्थान पर 225 टेबलेट दी गई। मार्च में भी 16 केसों में दुगनी दवाएं दी गई। कांट-छांट कर दवाएं बढ़ाई गई।

सहकारी मेडिकल दुकान नं. 6

11केसों में तो पेंशनर के साइन ही मेल नहीं खाए। डाॅक्टर ने अवधि नहीं लिखी, लेकिन एक महीने की दवा दी गई। मार्च में जांचे गए 9 केसों में दुगनी दवाइयां दी गई और किसी अन्य की राइटिंग में दवाएं डायरियों में लिखी गई।

हमें नहीं मिली रिपोर्ट

अभी इस बारे में कुछ नहीं मालूम। ट्रेजरी से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। लिखित में आएगा तो ही मानूंगा। बिलों का भुगतान क्यों रुका हुआ है नहीं पता। हमारा काम बिल भेजने का है। -कैलाशमीणा, जीएम,सहकारी होलसेल भंडार

पेंशनरों ने नहीं की गड़बड़ी

डायरी में समय के मामले को लेकर हम जिला कलेक्टर से मिलेंगे। पेंशनर द्वारा गड़बड़ी नहीं की गई है, होलसेल भंडार वालों की मिलीभग
खजाना लुटने लगा तो आया होश

पेंशनर को दी जाने वाली इन दवाओं का भुगतान कोष कार्यालय के माध्यम से होता है। जब खजाना लुटने लगा तो अधिकारियों को होश आया और जांच करवाई। 2013 में स्पष्ट दिख रहा है कि हर महीने दो से तीन लाख अतिरिक्त रुपयों की दवाइयों का भुगतान हो रहा है। जब यह मात्रा मार्च 2014 में करोड़ों में पहुंची तो रेंडम जांच हुई। इसमें गड़बडिय़ां सामने आई। आरपीएमएफ फंड में प्रत्येक राज्य कर्मचारी का निर्धारित मात्रा में अंशदान लिया जाता है। इससे यह खर्च उठाया जाता है।