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सात साल में भी नहीं लगा प्लांट

7 वर्ष पहले
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^एसडब्ल्यूडीपी को बनाने का काम आगे करने के लिए एक करोड़ की मांग की। परिषद यह राशि नहीं दे रही है। काम दो साल से बंद हैं। राशि मिलने पर काम शुरू हो पाएगा। -जेकेशर्मा, डिप्टीरेजिडेंट मैनेजर, आवास विकास लि., जयपुर।

कब से बना प्लान

स्थानीयनिकाय विभाग निदेशालय के आदेश से 23 जनवरी को 2007 को प्लांट के लिए स्वीकृति जारी की गई। शुरू में इसे गोलेटा के टचिंग ग्राउंड में बनाने का निर्णय लिया। बाद में ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए अग्यारा में जमीन अलाट कराके बनाने का काम शुरू हुआ।

^परिषद की ओर से शुरुआती दो किश्त दी गई। तीसरी किश्त डीएलबी ने जारी कर दी। प्लांट पर 72.10 लाख रुपए आवास विकास ने खर्च किए। 17 लाख से अधिक राशि का उपयोग होने का प्रमाण पत्र उन्हें देना है। उन्होंने एक करोड़ की मांग और की है। इस के लिए डीएलबी को पत्र लिखा। -नरेंद्रअजमेरा, एक्सईएन,नगर परिषद।

एक करोड़ नहीं मिलने पर रुका काम

कार्यशुरू करने के लिए परिषद ने पहली किश्त मई 2008 में आवास विकास लिमिटेड को दी। यह 31.25 लाख रुपए थी। इसके बाद दूसरी किश्त की राशि 18.65 लाख रुपए अप्रैल 11 में दी गई। इसके बाद निदेशालय स्तर पर 40 लाख रुपए का भुगतान भी किया गया। परिषद की ओर से मात्र 89.90 लाख रुपए की राशि आवास विकास को दी गई। प्लांट पर की लागत 3.47 करोड़ बताते हुए आवास विकास ने परिषद से एक करोड़ रुपए की मांग की। यह राशि परिषद नहीं दे पाई. राशि के लिए डीएलबी के निदेशालय को पत्र लिखे। वहां से भी राशि का भुगतान नहीं हुआ। इसके लिए परिषद की ओर से डीएलबी को 7 मई 12, 18 मई 12, 4 जनवरी 13 24 अप्रैल 2014 को पत्र लिखे गए। राशि स्वीकृत नहीं होने से काम रुका हुआ है।

भास्कर न्यूज|अलवर

ठोसकचरे का निदान करने के लिए ठोस कचरा निस्तारण प्लांट (एसडब्ल्यूडीपी) अभी तक पूरा नहीं हो सका है। सात साल बीत चुके हैं और लाखों रुपए खर्च हो चुके हैं। फिलहाल काम बंद है। इससे ठोस कचरा के निस्तारण की योजना अटकी हुई है। पहले यह प्लांट गोलेटा गांव में स्थापित होना था, लेकिन बाद में इसका स्थान बदला गया। इसे अग्यारा गांव के पास लगाने के लिए कार्य शुरू हुआ। धीमी गति से एसडब्ल्यूडीपी का काम चला। काम शुरू हुआ तो दो-तीन किश्तों के बाद परिषद राशि नहीं दे पाई। इसके बाद निर्माण करने वाली आवास विकास लिमिटेड ने एक करोड़ रुपए की मांग की। राशि नहीं म