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मौसमी बीमारी के रोगियों से अस्पताल के वार्ड फुल

7 वर्ष पहले
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बीमारी के कारण

> शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में वायरल, मलेरिया और डेंगू मच्छरों के पनपने के कारण फैल रहे हैं।

> बारिश के जमा पानी, खुली टंकियों और पशुओं की खेळियों में सफाई के अभाव में लार्वा पनप रहा है।

> परिंडों, छत पर पड़े टायरों और कबाड़े के सामान में जमा पानी मच्छरों के लिए सुरक्षित स्थान बना हुआ है।

बरतेंसतर्कता

>बारिश के जमा पानी में मच्छरों को पनपने से रोकें और कूलर, टंकी, खेली, परिंडों को खाली कर धूप में सुखाकर पानी भरें। ये प्रक्रिया सात दिन में एक बार होनी चाहिए।

> जाली के गेट लगाकर घरों में मच्छरों के प्रवेश को रोकें। ग्रामीण क्षेत्र में मच्छरदानी लगाकर सोना चाहिए।

> स्क्रब टाइफस से बचने के लिए खुले पैर घास में घूमें और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी घास और झाड़ियों में खुले हाथ कार्य नहीं करें। माइट का लार्वा लगने पर काटता है और बीमारी फैलाता है।

बुखार के रोगी अधिक

अस्पतालमें इन दिनों जुकाम, खांसी के अलावा सर्वाधिक रोगी वायरल पीड़ित रहे हैं। अकेले मेडिसन विभाग में ही चार महीने से रोगियों की संख्या रोजाना साढ़े पांच साै से अधिक है। जून में 17115 रोगी मेडिसन विभाग में चिकित्सा परामर्श लेने आए। वहीं जुलाई में 17564, अगस्त में 17994 और 15 सितंबर तक 9642 रोगी चुके हैँ। वहीं सैटेलाइट अस्पताल में भी करीब तीन सौ से चार सौ रोगियों का आउटडोर है।

अलवर. राजीव गांधी अस्पताल के मेल मेडिकल वार्ड में भर्ती मरीज।

भास्कर न्यूज | अलवर

शहरसहित ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी बीमारियों के फैलने से अस्पतालों में रोगियों की संख्या बढ़ गई है। मेडिकल वार्ड, फ्लोटिंग वार्ड फुल होने के बाद बुखार के रोगियों को अन्य वार्डों में भर्ती किया जा रहा है। अस्पताल में सोमवार को भी करीब चौबीस सौ रोगी आउटडोर में चिकित्सा परामर्श के लिए पहुंचे। यही हाल मंगलवार को रहा। ओपीडी में रोगियों की कतार लगी रही। राजीव गांधी अस्पताल में पिछले कई दिनों से हालात ये हैं कि रोगियों से मेडिकल वार्डों में सभी 120 बैड फुल हैं। वहीं 17 बैड वाला एक्सटेंशन फ्लोटिंग वार्ड भी मौसमी बीमारियों के रोगियों से भरा है। ऐसे हालात में मानसिक रोगी वार्ड एवं सर्जिकल के मेल और फीमेल वार्ड में रोगियों को भर्ती किया जा रहा है। इन वार्डों में करीब दो दर्जन रोगी भर्ती हैं।

^अस्पतालमें आने वाले रोगियों के