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शहर में रहकर चुनेंगे गांव की सरकार

7 वर्ष पहले
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हर बार की तरह निभाएंगे भागीदारी

गांव नांगल खोडिय़ा निवासी डा. आदर्श अग्रवाल ने बताया कि परिवार सहित बहरोड़ में आठ माह पूर्व ही निवास किया है। परिवार के अन्य लोग भी यहां निवास करते हैं। इस कारण यहां आना पड़ा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में ड्यूटी होने के कारण गांव से जाने में परेशानी हो रही थी। अभी गांव की मतदाता सूची से नाम नहीं कटवाया गया।

गांव खरकड़ा निवासी वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि शहर में पिछले दस सालों से निवास कर व्यवसाय करते है। गांव में लोगों से लगाव होने के साथ-साथ गांव में जमींन जायदाद बरकरार है। शहर की सरकार के बजाय गांव की सरकार चुनने का जश्न का अलग ही अंदाज है। गांव की मतदाता सूची से नाम नहीं कटाया गया।

गांव खोहर निवासी सुषमा राघव ने बताया कि वह अपने पति संजय राघव के साथ पिछले 8 सालों से बहरोड़ में निवास करती है। दोनों ही निजी स्कूल में सेवाएं दे रहे हैं। नौकरी बच्चों की शिक्षा के लिए गांव को छोड़कर शहर आना पड़ा। लेकिन परिवार गांव में होने के कारण शहर की मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़वाया गया। आने वाले चुनाव में ग्राम पंचायत में मतदान किया जाएगा।

गांव गंडाला निवासी मीरा अग्रवाल ने बताया कि वह पति देवर के साथ पिछले करीब दस सालों से बहरोड़ में निवास करती है। स्वयं गृहिणी है पति माणकचंद्र अग्रवाल तेल मील चलाने के साथ-साथ व्यापारी है। गांव में परिवार के सास-ससुर अन्य लोग निवास करते हैं। गांव में परिवार के साथ मतदाता सूची में नाम है।

गांव की मतदाता सूचियों से नहीं कटाया नाम, पंचायत चुनाव है निकट

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