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एकीकरण की गाइड लाइन मांगी तो हैरान रह गए डीईओ
अब कौन सुनेगा परिवेदनाओं की ‘वेदना’
एकीकरणकी गाइडलाइन नहीं होने के बाद अब यह समस्या पैदा हो गई है कि जो परिवेदना विभाग को मिली हैं उनकी वेदना कौन सुनेगा। इन परिवेदनाओं का क्या होगा? गौरतलब है कि छंटाई के बाद विभाग को 92 परिवेदनाएं मिली थी जिनमें से 27 को स्वीकार किया था। इन परिवेदनाओं पर जिला कलेक्टर की अनुशंषा के बाद सरकार के स्तर से कार्रवाई होनी थी।
पहलेफुटबॉल अब क्लीन बोल्ड
एकीकरणकी परिवेदनाएं पिछले एक सप्ताह से फुटबॉल बनी हुई थी। शिक्षाधिकारी रोजाना कलेक्टर के यहां इन परिवेदनाओं को लेकर जाते, लेकिन खामी होने के कारण प्रस्तावों को वापस लेकर लौट आते। इसके बाद कलेक्टर के सुझावों से प्रस्तावों को दुरुस्त किया जाता रहा। अब इन परिवेदनाओं का मामला ही अटक गया है।
^परिवेदनाओं के प्रस्तावों पर अनुशंषा के लिए जिला कलेक्टर ने एकीकरण की गाइडलाइन मांगी थी, हमने निवेदन किया कि विभाग के उच्च अधिकारियों के आदेश पर एकीकरण के प्रस्ताव तैयार किए। गुरुवार को फिर कलेक्टर से मिलेंगे। सरदारमलयादव, जिलाशिक्षा अधिकारी
भास्कर न्यूज | अलवर
एकीकरणके लिए तीन महीने मशक्कत करने के बाद अब डीईओ अधिकारियों के सवालों के भंवर में फंस गए हैं। एकीकरण की परिवेदनाओं के प्रस्ताव बनाकर अनुशंषा के लिए गए डीईओ सरदारमल यादव को जिला कलेक्टर एमपी स्वामी ने पूछा लिया कि किस गाइडलाइन के तहत एकीकरण किया गया है? पहले वह गाइडलाइन प्रस्तुत करें। इस पर यादव हैरान रह गए। सफाई दी कि प्रस्ताव उच्च अधिकारियों के मौखिक आदेशों पर ही तैयार किए थे। इसकी लिखित गाइडलाइन उनके पास नहीं है। कलेक्टर ने बिना गाइडलाइन के अनुशंषा के लिए इनकार करते हुए प्रस्ताव लौटा दिए। कलेक्टर का तर्क था कि जब तक एकीकरण की गाइडलाइन नहीं देखी जाएगी, तब तक यह कैसे माना जाए कि उक्त परिवेदनाएं स्वीकार या अस्वीकार करने योग्य हैं।