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भुगतान नहीं होने से रुकी 108 एंबुलेंस

7 वर्ष पहले
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यह है भुगतान का नियम

जिलेके राजगढ़, टहला, तिजारा और नौगांवा में यदि किसी की तबीयत बिगड़ गई तो उसे स्वास्थ्य केन्द्र तक ले जाने के लिए प्राइवेट एंबुलेंस की ही तलाश करनी होगी। 108 पर डायल करने के बाद भी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाएगी। चाहे जान पर क्यूं बन आए। इन चार क्षेत्रों में एंबुलेंस का संचालन बंद है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से भुगतान नहीं किए जाने से एंबुलेंस से संबंधित एजेंसी जीवीकेएमआरआई गाड़ियों की मेंटीनेंस नहीं करा पा रही है। इस एजेंसी का चिकित्सा विभाग में एक साल से बीस प्रतिशत राशि का भुगतान अटका हुआ है, जो अब तक करीब 80 लाख रुपए हो चुका है। इन एंबुलेंस का संचालन कब शुरू होगा, यह जवाब चिकित्सा विभाग और एजेंसी के पास नहीं है। शेष| 12 पर









क्योंकिभुगतान के बिना वर्कशाप से गाड़ी नहीं निकालने से एजेंसी मना कर रही है। यही हाल रहा तो अन्य एक दर्जन गाड़ियों भी सर्विस और रिपेयर के अभाव में बंद होने के कगार पर हैं। क्योंकि कई गाड़ियों के टायर जवाब दे रहे हैं तो अधिकांश की सर्विस ही नहीं हो पा रही है। चिकित्सा उपकरण तो पुरानी गाड़ियों में हैं ही नहीं।

गाड़ी ऑफ रोड भी परेशानी

एंबुलेंसका ऑफ रोड होना भी एजेंसी के लिए मुसीबत है। क्योंकि उन पर कार्यरत कर्मचारियों को तो भुगतान करना होता है और विभाग ऑफ रोड गाड़ी का भुगतान नहीं करता।

22गाड़ियों में ये हैं परेशानियां

37में से 22 एंबुलेंस में सेल्फ स्टार्ट, टायर, गियर, ब्रेक, इंजन ऑयल और मेंटीनेंस की समस्या अगस्त से बनी हुई है। इस संबंध में विभाग को रिपोर्ट भी दे दी गई है।

^108 एंबुलेंस की 80 प्रतिशत राशि का भुगतान समय पर हो रहा है। लेकिन बीस प्रतिशत राशि के लिए बिल और गाड़ी का रिकार्ड समय पर नहीं मिल रहे हैं। वेरीफिकेशन नहीं होने पर भुगतान रुका है। -डॉ.आर के मीणा, सीएमएचओअलवर

^एकसाल से 108 एंबुलेंस की 20 प्रतिशत राशि अटकी हुई है, जो हर महीने बढ़ रही है। अब तक करीब 80 लाख रुपए हो चुके हैँ। बिल समय पर वेरिफिकेशन करा रहे हैँ। लेकिन बजट अभाव की बात कहकर भुगतान नहीं किया जा रहा है। इससे गाडिय़ों का मेंटीनेंस नहीं हो पा रहा है। -नरेशगुप्ता, 108एंबुलेंस प्रभारी, जीवीकेएमआरआई