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टीबी रोगियों को रोजाना दवा खाकर मिस्ड कॉल देकर बताना होगा

4 वर्ष पहले
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एचआईवी ग्रसित मरीजों के लिए भी नई दवा

एचआईवीग्रसित रोगियों को भी नई डॉट्स की दवा दी जा रही है। इन रोगियों को अप्रैल से यह दवा शुरू कर दी गई है। इन मरीजों की रोजाना दवा खाने के बाद मिस्ड कॉल से मॉनिटरिंग शुरू कर दी गई है। यह नई दवा भी नए एचआईवी और टीबी से एक साथ संक्रमित रोगियों को ही दी जा रही है। टीबी रोगियों की जांच कर पहचान करने और दवा देने वाले जिला मुख्यालय पर टीबी क्लीनिक सहित 25 सेंटर संचालित हैं।

भास्कर संवाददाता | अलवर

चिकित्साएवं स्वास्थ्य विभाग टीबी रोगियों के इलाज के लिए रोजाना नई डॉट्स की दवा खिलाएगा। इसकी शुरुआत अगले महीने से होने की संभावना है। एक दिन छोड़कर खाने वाली पुरानी डॉट्स की दवा बंद हो रही है। मरीज की ओर से रोजाना खाने वाली डॉट्स की दवा की मॉनिटरिंग मोबाइल से की जाएगी। मरीज को गोली गटकने के साथ ही दवा के रैपर पर लिखे मोबाइल नंबर पर मिस्ड कॉल करनी होगी। मिस्ड कॉल दर्ज होते ही विभाग समझ जाएगा कि रोगी ने दवा खा ली है। अगर निदेशालय स्तर पर बने कंट्रोल रूम में मिस्ड कॉल नहीं पहुंची, तो यह समझा जाएगा कि रोगी दवा लेने में लापरवाही बरत रहा है। ऐसे रोगी के घर संबंधित क्षेत्र का कर्मचारी समझाने के लिए पहुंचेगा। दवा नहीं खाने वाले रोगियों की सूचना प्रदेश के कंट्रोल रूम से हर सप्ताह जिला क्षय रोग अधिकारी के मोबाइल पर भेजी जाएगी। उल्लेखनीय है कि जिले में अब तक करीब छह हजार टीबी रोगी चिह्नित किए गए हैं।

^नएरोगियों को अब रोजाना डॉट्स की नई दवा खिलाई जाएगी। डॉट्स की सफलता के बाद अब विभागीय स्तर पर नई दवा शुरू की गई है। यह दवा अधिक प्रभावशाली है। रोजाना दवा खाने के बाद मरीज रजिस्टर्ड अपने मोबाइल से रैफर पर मिले नंबर से मिस्ड काॅल करेगा तो माना जाएगा की उसने दवा गटक ली है, लेकिन मिस्ड काॅल नहीं देने पर निदेशालय स्तर पर हर सप्ताह सूची बनाकर जिलों को भेजी जाएगी। इससे कर्मचारी उसका फॉलोअप करेंगे। -डॉ. राजेन्द्र चिटकारा, जिला क्षय रोग अधिकारी

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