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सीएचसी में खुले आसमान के नीचे होता है पोस्टमार्टम

5 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | अलवर/बर्डोद

देशके पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने बर्डोद अस्पताल का उद्घाटन किया था, उसमें अब खुले आसमान के नीचे पोस्टमार्टम हो रहे हैं। सोमवार को भी एक पोस्टमार्टम हुआ, जिसका सरपंच सुनील भारद्वाज ने विरोध किया। सीएचसी प्रभारी डॉ.सपना गोदारा ने इसे डॉक्टर की गलती मानी। प्रभारी का कहना है कि अस्पताल में बनी मोर्चरी पर कब्जा किया हुआ है। इससे परेशानी रही है।

बर्डोद कस्बे के सेठ रूडमल रघुनाथ दास महावर राजकीय रैफरल अस्पताल में सोमवार को पुलिस कस्बा निवासी ओमपाल सिंह का शव लेकर आई। ओमपाल सिंह की छह से गिरकर मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने अस्पताल परिसर दीवार के पास ही शव का पोस्टमार्टम कर दिया। बर्डोद सरपंच सुनील भारद्वाज का कहना है कि अस्पताल में जगह होने के बाद भी डॉक्टर खुले में पोस्टमार्टम करते हैं। इससे पहले 22 जुलाई 2016 को भी एक महिला का खुले में पोस्टमार्टम किया गया था। इसका पता लगने के बाद उन्होंने सीएचसी प्रभारी डॉक्टरों से विरोध किया था। भारद्वाज का कहना है कि अस्पताल की जगह सेठों ने दान में दी थी। वर्ष 1954 में सेठ मक्खनलाल महावर ने पूर्वजों की याद में ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल भवन का निर्माण कराया था। इसका 5 अप्रैल 1955 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन किया था। शेष| पेज 12





उससमय उन्होंने अस्पताल से कुछ दूरी पर मोर्चरी का भी निर्माण कराया था। 1984 में सरकार को अस्पताल परिसर और मोर्चरी की रजिस्ट्री कराई थी। बाद में राजकीय अस्पताल के अधिकारियो ने मोर्चरी पर से ध्यान हटा लिया और मोर्चरी परिसर पर अतिक्रमण हो गया। वर्तमान में मोर्चरी जर्जर हाल में है। अस्पताल अधिकारियों का मानना है कि मोर्चरी ग्राम पंचायत के अधीन है, जबकि रजिस्ट्री के अनुसार मोर्चरी अस्पताल का मालिकाना हक है। ग्रामीणों ने मोर्चरी से अतिक्रमण हटवाने की मांग की है।

मोर्चरी की जमीन पर कब्जा

^सालमें यहां बहुत कम पोस्टमार्टम होते हैं। मोर्चरी खराब हालत में है और उसकी जमीन पर भी कब्जा है। महिला का खुले में पोस्टमार्टम का मामला आया था। अस्पताल में एक कमरा साफ करा दिया था। डॉक्टरों को इस कमरे में ही पोस्टमार्टम करने के लिए कहा था। पता लगा है कि आज फिर खुले में पोस्टमार्टम कर दिया। हालांकि दीवार के पास परदे लगाकर पोस्टमार्टम किया था। फिर भी ऐसा करना गलत है। -डॉ.सपना गोदारा, सीएचसी प्रभारी

बर्डोद. सीएचसी में खुले में शव का पोस्टमार्टम करते चिकित्सक अन्य।

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