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उफ, ये कड़ाके की ठंड और रैनबसेरा बंद

7 वर्ष पहले
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शहर सहित पूरे जिले में रविवार को तीसरे दिन भी कड़ाके की ठंड पड़ती रही। जिले में बहराेड़, राजगढ़, कठूमर, कोटकासिम एवं नौगांवा सहित कई जगह मावठ हुई। मावठ से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। कृषि विशेषज्ञ फसलों के लिए इस मावठ को अमृत के समान बता रहे हैं। शहर में तड़के से ही ओस गिरना शुरू हुई, जो दोपहर करीब 12 बजे तक चलती रही। दूसरे दिन भी बादल छाए रहने से धूप नहीं निकली। सूरज बादलों की ओट में खोया रहा। इससे सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। दिनभर लोग ठिठुरते रहे।

^रैनबसेरों में गार्ड लगाए हैं। वे लापरवाही बरतेंगे तो कार्रवाई की जाएगी। नगर परिषद की ओर से रैनबसेरों का कभी भी निरीक्षण किया जा सकता है। -अशोकखन्ना, सभापति

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भास्कर न्यूज | अलवर

शहरमें तीन दिन से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। रविवार को तड़के से दोपहर तक फुहारें पड़ने ने सर्दी रंगत पर गई। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। शीतलहरों ने लोगों को ठिठुरा दिया। लोग अलाव तापकर सर्दी से बचाव की जतन करते रहे। बाजारों में भी रौनक कम रही। शाम होते ही लोग अपने घरों में जा दुबके।

इस कड़ाके की ठंड में बेसहारा बेघर लोगों के साथ मजदूरी कर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों के सामने रात बिताना सबसे मुश्किल हो गया। प्रशासन ने हालांकि ऐसे लोगों के सर्दी से बचाव के लिए शहर में चार रैनबसेरे खोले हैं, लेकिन इन सभी रैनबसेरों का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। एक रैनबसेरे पर रविवार रात ताला लटका मिला। इसके अलावा यह बात भी सामने आई कि बिना पहचान पत्र के इन रैनबसेरों में जरूरतमंदों को रात में रुकने नहीं दिया जा रहा है।

भास्कर टीम ने रविवार रात 11 बजे शहर में घूमकर खुले आसमान तले ठंड में रात गुजार रहे लोगों की स्थिति जानीं। स्टेशन के आसपास, स्टेशन रोड, बिजलीघर चौराहे के आसपास, बस स्टैंड सहित कई जगह लोग पतली चादर या कंबल में रात गुजारते मिले। शेषपेज |16

इनलोगों ने रैनबसेरों में नहीं रुकने देने की अपनी समस्या बताईं।

इधर, नगर परिषद सभापति अशोक खन्ना रात करीब साढ़े दस बजे शहर के रैनबसरों की हकीकत जानने के लिए दौरे पर निकले। इस दौरान उन्हें खदाना मोहल्ले में बने रैनबसेरे पर ताला लटका मिला। काफी प्रय