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नाटक \"वीमा\' में दर्शाए निशक्तजनों के जज्बात

7 वर्ष पहले
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जयपुरकी परम्परा नाट्य संस्था की ओर से प्रस्तुत नाटक \\\"वीमा\\\' में निशक्तजनों की पीड़ा को मार्मिक तरीके से उठाया गया। दिलीप भट्ट के निर्देशन में इस नाटक का मंचन रविवार को यहां जैन बीएड काॅलेज के रंगमंच पर किया गया। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक र|कुमार सांभरिया की ओर से निशक्तों के जज्बात पर देश का यह पहला नाटक लिखा गया है।

नाटक की नायिका वीमा को दिखाई नहीं देता। वह घर से प्रताड़ित होकर निकल जाती है। ट्रेन में बैठकर दूसरे शहर पहुंचती है। वहां उसके निशक्त होने का फायदा एक अन्य उठाना चाहता है। एक अन्य नेत्रहीन आकर उसकी मदद करता है। दोनों एक-दूसरे को समझने लगते हैं तो सामाजिक रूप से विरोध होने लगता है। नाटक देखने के लिए अच्छी संख्या में दर्शक मौजूद थे। नाटक में वीमा-विनीता, नमन-अक्षय श्याम जी की भूमिका रूपेंद्र ने निभाई। नाटक श्री चंद्रप्रभु विकलांग कल्याण समिति के बैनर तले पेश किया गया। नाटक के लेखक रतनकुमार सांभरिया भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। नाटक के अन्य कलाकारों में अमरसिंह, पंकज, रवि, विशाल आदि थे।

अलवर. नाटक वीमा में प्रस्तुति का एक दृश्य।

जयपुर की परम्परा नाट्य संस्था की मार्मिक प्रस्तुित

रंगमंच