एक मिनट में एक रोगी का इलाज
एक डॉक्टर और सवा दो सौ से अधिक रोगी बच्चे। सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक लगातार डॉक्टर ने चिकित्सा परामर्श दिया। एक बजते ही डॉक्टर साहब ने सीट छोड़ दी और करीब 30 से अधिक बच्चे चिकित्सा परामर्श से वंचित रह गए। लाइन में लगे बच्चों के परिजनों ने डॉक्टर से आग्रह भी किया, लेकिन डॉक्टर राजीव गांधी अस्पताल की इमरजेंसी में चिकित्सा परामर्श लेने की बात कह कर चले गए। इसके बाद निराश परिजन बच्चों को लेकर चले गए।
यह हाल था शनिवार को गीतानंद शिशु अस्पताल के आउटडोर का। यहां आउटडोर में मात्र डॉ. राशि कौशिक ही थे, जिन्होंने रोगी बच्चों को चिकित्सा परामर्श दिया। हालांकि बच्चों के इलाज के लिए अस्पताल में छह डॉक्टर नियुक्त हैं, लेकिन इनमें से डॉ. लव कुंदनानी महिला अस्पताल में कॉल पर सिजेरियन ऑपरेशन से होने वाली डिलीवरी के दौरान बच्चों की जांच के लिए चले गए और डॉ. सोमदत्त गुप्ता ने अस्पताल के सभी जनरल वार्ड और एफबीएनसी वार्ड में भर्ती बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। अस्पताल प्रभारी डॉ. महेश शर्मा छुट्टी पर थे और डॉ. नीरज जैन जयपुर में ट्रेनिंग पर गए हुए हैं। वहीं कांट्रेक्ट पर लगे डॉ. एमसी गुप्ता भी छुट्टी पर थे।
इस अव्यवस्था के चलते अस्पताल के आउटडोर में अतिरिक्त मेडिकल ऑफिसर की व्यवस्था नहीं होने से महिलाएं बच्चों को लेकर परेशान रही और एकमात्र मेडिकल ऑफिसर डॉ. कौशिक ही रोगियों को चिकित्सा परामर्श देते रहे। बाद में वे राजीव गांधी अस्पताल की इमरजेंसी में जाने की बात कह कर चले गए। निराश महिलाएं बच्चों को लेकर लौट गई।
गीतानंद शिशु अस्पताल का अलग से स्टाफ नहीं है। यह अस्पताल राजीव गांधी अस्पताल के वार्ड के रूप में ही संचालित है। यहां फिलहाल एक वरिष्ठ विशेषज्ञ और कनिष्ठ विशेषज्ञ के चार पद हैं। लेकिन इन पर पांच चिकित्सा अधिकारी (शिशु रोग) कार्यरत हैं। एफबीएनसी वार्ड के लिए कांट्रेक्ट पर सेवानिवृत शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एससी गुप्ता को लगाया हुआ है।
^शिशुअस्पताल से इस संबंध में जानकारी नहीं मिली। अगर आउटडोर में परेशानी की समय पर सूचना मिलती तो वहां मेडिकल ऑफिसर की व्यवस्था की जा सकती थी। लेकिन भविष्य में कोई बच्चा इलाज से वंचित नहीं रहे, इसके पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। -डॉ.एमसी गुप्ता, पीएमओअलवर
अस्पताल में डॉक्टरों की स्थिति